Exclusive Interview: यह रामायण को सुपरहीरो फिल्म की तरह पेश करने की कोशिश नहीं हैं: शील वर्मा

punjabkesari.in Thursday, Oct 01, 2026 - 03:21 PM (IST)

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारतीय संस्कृति और धार्मिक कथाओं में रामायण का विशेष स्थान है। भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के किरदारों को पर्दे पर निभाना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी से कम नहीं है। फिल्म ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ में इन पौराणिक किरदारों को कलाकार देव शर्मा, अंजलि और शील वर्मा निभा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन अभिषेक सिंह ने किया है। यह फिल्म 25 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म के बारे में देव शर्मा, अंजलि और शील वर्मा ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश... 


देव शर्मा

सवाल: जब आपको ‘श्री रामायण कथा’ का ऑफर मिला तो आपका पहला रिएक्शन क्या था? क्या आपको तुरंत लगा कि ये किरदार करना चाहिए?

देव शर्मा: मेरा पहला रिएक्शन था कि शायद मुझे यह फिल्म नहीं करनी चाहिए। इससे पहले मुझे दो बार लक्ष्मण का किरदार ऑफर हो चुका था लेकिन दोनों बार किसी न किसी वजह से बात नहीं बन पाई। इसलिए मेरे मन में थोड़ा सेटबैक था कि शायद मुझे रामायण नहीं करनी है। जब अभिषेक सर का फोन आया तो मैंने उनसे कहा कि मैं रामायण नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि हम आपको लक्ष्मण नहीं, बल्कि भगवान राम के किरदार में देख रहे हैं। मैं खुद को राम के रूप में सोच नहीं पा रहा था। लेकिन उन्होंने मेरा एक AI लुक तैयार किया था। जब मैंने खुद को उस रूप में देखा तो मैं काफी हद तक कन्विंस हो गया। फिल्म के गाने सुने तो लगा कि यह ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसे मैं जरूर करना चाहता हूं।

सवाल: राम, सीता और लक्ष्मण जैसे किरदारों को निभाते हुए क्या सात-आठ महीने बाद आपकी बातचीत और व्यवहार पर भी उसका असर पड़ा?

देव शर्मा: बिल्कुल। हम काफी सादी और शुद्ध हिंदी में बात करने लगे थे। सबसे भावुक पल शूटिंग के आखिरी दिन आया। जब उमरगांव में बनाए गए महल के सेट को हटाया जा रहा था तो हम सबकी आंखें नम थीं। हमने सात-आठ महीने उन किरदारों को जिया था, जिन्हें बचपन से देखते और मानते आए हैं। इसलिए शूटिंग खत्म होने पर ऐसा लगा जैसे एक पूरी दुनिया हमसे दूर हो रही है।

सवाल: शूटिंग खत्म होने के बाद उस दुनिया से निकलकर सामान्य जिंदगी में लौटना कितना मुश्किल था?

देव शर्मा: काफी मुश्किल था। खासकर गुजरात वाले हिस्से में हमारी नाइट शूटिंग होती थी। शाम सात बजे से सुबह 10 बजे तक शूट चलता था, इसलिए हमारी पूरी स्लीप साइकिल बदल गई थी। लेकिन असली बदलाव यह था कि हमने उस दुनिया को सिर्फ एक फिल्म की तरह नहीं लिया। अभिषेक सर ने भी हमें यही समझाया कि यह एक बार मिलने वाला मौका है। राम, सीता और लक्ष्मण जैसे किरदार बार-बार निभाने का अवसर नहीं मिलता। इसलिए हमने इसे पूरी श्रद्धा और ईमानदारी से जिया। शूट खत्म होने के बाद वापस मॉडर्न दुनिया में आना थोड़ा अजीब लगा।

अंजलि
सवाल: माता सीता के किरदार के लिए आपका चुनाव कैसे हुआ?

अंजलि: मेरे सामने भी डायरेक्टर सर AI के जरिए एक लुक लेकर आए थे कि मैं सीता के रूप में कैसी दिखूंगी। जब मैंने खुद को उस रूप में देखा तो मैं भी हैरान थी कि मैं ऐसी लग सकती हूं। फिर मैंने सोचा कि इसे करना चाहिए। मेरे मैनेजर प्रीति मेरे साथ मीटिंग में गई थीं। टीम ने जिस तरह से पूरा प्रेजेंटेशन तैयार किया था, उससे मैं काफी प्रभावित हुई। मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने मुझे ही क्यों चुना। उन्होंने कहा कि सीता के किरदार में जिस मासूमियत की जरूरत है, वह उन्हें मुझमें दिखाई देती है। बस, फिर मैंने सोचा कि जब उन्होंने मुझे चुन ही लिया है तो इसे पूरी ईमानदारी से करते हैं।

सवाल: फिल्म में हिंदी के साथ छत्तीसगढ़ी भाषा में भी डबिंग की गई है। इसका अनुभव कैसा रहा?

अंजलि: हमने हिंदी के साथ छत्तीसगढ़ी में भी अपनी आवाज में डबिंग की है। किसी दूसरे वॉइस आर्टिस्ट की मदद नहीं ली। कई सीक्वेंस दोनों भाषाओं में शूट करने पड़े, इसलिए कभी-कभी लाइन ऊपर-नीचे हो जाती थी और हमें दोबारा करना पड़ता था। लेकिन यह अनुभव काफी खास रहा।

सवाल: आपने मुंबई आकर पार्टियों के जरिए नेटवर्किंग करने के बजाय अपने काम पर ज्यादा भरोसा किया। ऐसा क्यों?

अंजलि: मैंने 2022 में मुंबई शिफ्ट किया था, लेकिन मुझे कभी नहीं लगा कि नेटवर्क बनाने के लिए पार्टियों में जाना जरूरी है। मैं खुद कभी पार्टीज में जाकर नेटवर्किंग करने में विश्वास नहीं करती। अगर आपके अंदर कला और हुनर है तो उसे दिखाने के लिए आज बहुत सारे प्लेटफॉर्म हैं। सोशल मीडिया भी उनमें से एक है। अगर आप वाकई काबिल हैं तो आपको कहीं से भी मौका मिल सकता है। जरूरी नहीं कि पार्टियों में जाकर ही नेटवर्क बनाया जाए।

शील वर्मा
सवाल: आपको लक्ष्मण का किरदार कैसे मिला?

शील वर्मा: हमारे डायरेक्टर अभिषेक सिंह सर भी छत्तीसगढ़ से हैं। करियर की शुरुआत में मैंने उनसे काफी मार्गदर्शन लिया था। करीब चार-पांच साल बाद एक दिन उनका अचानक फोन आया। उन्होंने कहा कि मैं रामायण बना रहा हूं और लक्ष्मण के लिए तुम्हें देख रहा हूं, करोगे? मैंने तुरंत हां कह दी। छत्तीसगढ़ में रामायण और राम से जुड़ी परंपराओं का अपना खास महत्व है। मैं वहां राम का किरदार भी निभा चुका था, इसलिए शायद उन्होंने मुझे उस रूप में देखा था। लक्ष्मण का जो थोड़ा आक्रामक और योद्धा वाला पक्ष है, उसे लेकर मैं शुरू से काफी कॉन्फिडेंट था। फिर जब देव से मिला तो हमारे बीच बड़े भाई-छोटे भाई वाला बॉन्ड भी बहुत खूबसूरती से बन गया।

सवाल: क्या किसी सीन या किरदार के लिए आपको सबसे ज्यादा मेहनत करनी पड़ी?

शील वर्मा: मेरे लिए शूटिंग से ज्यादा मुश्किल डबिंग थी। फिल्म पूरी होने के करीब डेढ़ साल बाद जब हम डबिंग के लिए आए तो इस बीच मैंने कुछ टीवी शो और फिल्में कर ली थीं। मेरी आवाज भी थोड़ी बदल गई थी। लक्ष्मण की आवाज और लहजे में वापस आने के लिए शुरुआत में 13-14 टेक लगे। उस किरदार की आवाज को दोबारा पकड़ना मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था।

सवाल: फिल्म की शूटिंग कितने समय तक चली और किन जगहों पर हुई?

शील वर्मा: पूरी शूटिंग प्रक्रिया करीब सात-आठ महीने चली, जबकि हमारे शूटिंग डेज करीब 55 से 60 रहे। फिल्म की शूटिंग छत्तीसगढ़, भिलाई, रायपुर, चित्रकूट, अयोध्या, लखनऊ, मुंबई और गुजरात के उमरगांव समेत कई जगहों पर हुई।

अंजलि: मेरे करीब 24-25 शूटिंग डेज थे, क्योंकि बाकी कलाकारों के ज्यादा एक्शन और युद्ध वाले सीक्वेंस थे।

सवाल: शूटिंग के दौरान आपका सबसे यादगार या पसंदीदा सीन कौन सा रहा?

देव शर्मा: मेरे लिए पहला दिन ही सबसे खास था। जब मैं कॉस्ट्यूम और मेकअप के बाद वैनिटी से बाहर आया तो सेट पर करीब 350 लोग मौजूद थे। इनमें कई बुजुर्ग भी थे। कुछ लोग 70 साल से ज्यादा उम्र के थे और उन्होंने मेरे पैर छूने शुरू कर दिए। उस पल मुझे एहसास हुआ कि वे मेरे अंदर देव शर्मा को नहीं, बल्कि भगवान राम को देख रहे हैं। उस दिन मेरे अंदर जिम्मेदारी का भाव और भी बढ़ गया। मुझे लगा कि अब इस किरदार को बहुत मर्यादा, ठहराव और सच्चाई के साथ निभाना होगा।

शील: परशुराम जी के साथ मेरा एनकाउंटर वाला सीन। उनके साथ काम करना बहुत शानदार अनुभव था। वह बहुत अच्छे कलाकार हैं और उस पूरे सीक्वेंस को करने में मुझे बहुत मजा आया। गुजरात में जो महल का सेट बनाया गया था, वह भी बहुत भव्य था।

सवाल: जब आप मुंबई जैसे शहर में करियर शुरू करने आए तो लोगों की अलग-अलग सलाह मिलती है। कैसे तय किया कि कौन सी सलाह सही है और कौन सी नहीं?

शील:  मैं दो-तीन दिन तक कमरे की लाइट बंद करके अंधेरे में बैठा रहा हूं। करीब डेढ़-दो साल तक ऐसा लगा कि मुझसे अब नहीं हो पा रहा है। यहां हालात कुछ अलग थे और मुश्किलें भी काफी ज्यादा थीं। परिवार में भी कुछ चीजें चल रही थीं इसलिए हर तरफ से खुद को ब्लॉक महसूस कर रहा था। कई लोगों ने मुझसे कुछ फेवर मांगे जिन्हें मैं यहां विस्तार से नहीं बताना चाहता लेकिन मना करने पर करियर खत्म करने तक की धमकियां मिलीं। आज वही लोग जिन्होंने मुझे ब्लॉक किया था मुझसे काम की डेट्स मांगते हैं।

देव: मेरे लिए शुरुआत काफी मुश्किल रही। एक समय ऐसा भी आया जब मुझे लगा कि शायद यह मेरे लिए नहीं हो रहा। लेकिन मेरे नानाजी ने मुझे शुरुआत में पांच स्टेप बताए थे- पहले एक्टिंग सीखो, फिर थिएटर करो, उसके बाद कमर्शियल काम करो, किसी अच्छे डायरेक्टर को असिस्ट करो और फिर ऑडिशन दो। मैंने उनकी सलाह को फॉलो किया। आसपास के लोग अलग-अलग बातें कहते थे कि जिम करो, बॉडी बनाओ, लोगों से सेटिंग करो या पार्टियों में जाओ। लेकिन मैंने इन सबके बजाय अपने नानाजी की बात पर भरोसा किया। मेरा मानना है कि सीखना बहुत जरूरी है। मैंने वही रास्ता अपनाया और आज उसका नतीजा आपके सामने है।


सवाल: युवा पीढ़ी और खासकर जेन जी को ‘श्री रामायण कथा’ क्यों देखनी चाहिए?

देव शर्मा: हमने इस फिल्म को बहुत आस्था और पवित्रता के साथ बनाया है। रामायण के हर किरदार से हमें कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। इन सीखों को हम अपनी जिंदगी में भी उतार सकते हैं। आज की युवा पीढ़ी अगर आध्यात्मिकता और संस्कृति से थोड़ा दूर हो रही है तो हम चाहते हैं कि वह इस फिल्म को देखे और परिवार के साथ इसका अनुभव करे।

अंजलि: हम भी जेन जी का हिस्सा हैं। हमने इन किरदारों को पूरी पवित्रता और ईमानदारी से निभाने की कोशिश की है। मेरा मानना है कि अगर आप किसी चीज को सच्चे मन और सही नीयत से करना चाहते हैं तो वह जरूर संभव है। जब युवा इस फिल्म को देखेंगे तो उन्हें इसमें मासूमियत, पवित्रता और गरिमा नजर आएगी। हमने इस फिल्म के लिए बहुत मेहनत की है। फिल्म 25 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है, इसलिए जरूर देखें और अपनी राय हमारे साथ साझा करें।

शील वर्मा: आज के दौर में आधुनिक होने के साथ कहीं न कहीं हमारी जिंदगी से वह सादगी कम होती जा रही है। हमारे डायरेक्टर सर हमेशा कहते हैं कि हम यहां सादगी परोस रहे हैं। यह रामायण को किसी सुपरहीरो फिल्म की तरह पेश करने की कोशिश नहीं है, बल्कि रामायण को रामायण की तरह ही दिखाया गया है। कहानी सबको पता है, लेकिन हमारी मेहनत, आस्था और डायरेक्टर के विजन के जरिए इसे एक बार नए नजरिए से जरूर देखिए। 25 सितंबर को सिनेमाघरों में मिलते हैं। जय श्री राम।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Manisha

Related News