‘किस्सा कोर्ट कचहरी का’ में दिखेगा न्याय व्यवस्था का असली चेहरा, 13 मार्च को 300 सिनेमाघरों में होगी रिलीज़
punjabkesari.in Friday, Mar 06, 2026 - 05:54 PM (IST)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सिनेमा के पर्दे पर अक्सर कोर्ट-कचहरी को तीखी बहसों और हाई-वोल्टेज ड्रामे के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन लवली फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड की आगामी फिल्म 'किस्सा कोर्ट कचहरी का' इस छवि को तोड़ने के लिए तैयार है। यह फिल्म न्याय व्यवस्था के उन गलियारों की कहानी है जहाँ धूल, फाइलें और खामोशियाँ चीख-चीख कर अपनी दास्तां सुनाती हैं।
निर्देशक रजनीश जायसवाल ने फिल्म की बुनावट में 'स्वाभाविकता' को सर्वोपरि रखा है। उनका कहना है कि इस फिल्म का उद्देश्य किसी काल्पनिक दुनिया को रचना नहीं, बल्कि देश की वास्तविक कानूनी प्रणाली और आम आदमी के संघर्षों को दर्शकों तक पहुँचाना है। कैमरे का इस्तेमाल एक मूक गवाह की तरह किया गया है, जो न्याय प्रणाली के भीतर छिपे डर और गुप्त संवादों को बड़ी बारीकी से पकड़ता है। अब निर्देशक अपने अगले प्रोजेक्ट DNA फ़िल्म पर जोरों शोरों से काम करेंगे।
निर्माता अरुण कुमार के अनुसार, इस फिल्म की जान इसकी 'कास्टिंग' है। उन्होंने सितारों के बजाय ऐसे चेहरों पर भरोसा जताया है जो भीड़ में अपनी अलग पहचान रखते हुए भी आम इंसान नजर आएं।
दिग्गज अभिनेता राजेश शर्मा ने कहा, "इस फिल्म की पटकथा में जो ठहराव है, वही इसकी जान है। यह फिल्म सिखाती है कि कानून की मोटी किताबों से कहीं ज्यादा वजन एक आम इंसान की मजबूरियों और उसकी खामोश दास्तां में होता है।"
अभिनेता बृजेंद्र काला ने साझा किया, "सिनेमा जब सामाजिक सरोकार से जुड़ता है, तभी वह यादगार बनता है। इस फिल्म के जरिए हमने न्याय प्रणाली के उस मानवीय चेहरे को दिखाने की कोशिश की है जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।"
इस फिल्म का प्राथमिक उद्देश्य लीगल ड्रामा के जॉनर में एक नया 'रेफरेंस पॉइंट' स्थापित करना है, जो पारंपरिक अदालती कहानियों से इतर वास्तविकता को पेश करे। प्रवेश मलिक की मर्मस्पर्शी धुनें और धर्मेंद्र बिस्वास के गहरे विजुअल्स इस अनुभव को और भी प्रभावशाली बनाते हैं, जो मिलकर यह दर्शाते हैं कि इंसाफ की जंग अक्सर शोर-शराबे से दूर कितनी शांत और एकाकी हो सकती है।
'किस्सा कोर्ट कचहरी का' की निर्माण प्रक्रिया और इसकी सिनेमाई यात्रा से जुड़ी प्रमुख विशेषताओं पर नजर डालें, तो यह फिल्म अपनी सघनता और वास्तविकता के कारण खास बन जाती है। इस फिल्म की अधिकांश शूटिंग उत्तर प्रदेश के मेरठ की वास्तविक लोकेशन्स पर की गई है, ताकि वहां की मिट्टी और माहौल की महक को पर्दे पर उतारा जा सके। फ़िल्म के जरिये मेरठ के स्थानीय लोगों को एक्टिंग, प्रोडक्शन, आर्ट और कई तकनीकी डिपार्टमेंट में काम दिया गया है।
अभिनय के मोर्चे पर, फिल्म में राजेश शर्मा, बृजेंद्र काला, नीलू कौर कोहली, सुशील चंद्रभान परासर,अंजू जाधव, लोकेश तिलकधारी, कृष्णा सिंह बिष्ट,अवन्या कुमारी और नंदिनी सिंह राजपूत जैसे मंझे हुए कलाकारों की टोली नजर आएगी, जो किरदारों में जान फूंकने का काम कर रही है। पैनोरमा स्टूडियो इंटरनेशनल लिमिटेड के सहयोग से तैयार की गई यह फिल्म अपनी रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार है और 13 मार्च, 2026 को यह 300 सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह फिल्म केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था की जड़ों में रची-बसी एक मानवीय गाथा है।
