एंटरटेनमेंट फुल ऑन Dhamaal 4 ,फैमिली और बच्चों के लिए पैसा वसूल वीकेंड ट्रीट
punjabkesari.in Friday, Jul 10, 2026 - 01:40 PM (IST)
फिल्म: धमाल 4 (Dhamaal 4)
कलाकार: अजय देवगन (Ajay Devgn), अरशद वारसी (Arshad Warsi),रितेश देशमुख (Riteish Deshmukh),जावेद जाफरी (Javed Jaffrey), रवि किशन (Ravi Kishan), संजय मिश्रा (Sanjay Mishra), अंजलि आनंद (Anjali Anand) , संजीदा शेख (Sanjeeda Sheikh), ईशा गुप्ता (Esha Gupta)
निर्देशक: इंद्र कुमार (Indra Kumar)
रेटिंग: 3 स्टार
Dhamaal 4: अजय दवगन और मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म धमाल की नई किस्त सिनेमाघरों में आज रिलीज हो चुकी है। इस बार फिल्म में कुछ पुराने तो कुछ नए चेहरे नजर आ रहे हैं। धमाल फ्रैंचाइजी की शुरुआत साल 2007 से हुई थी जिसके बाद इसका दूसरा पार्ट डबल धमाल साल 2011 में आया और तीसरा 'टोटल धमाल' 2019 में आया। वहीं अब फिल्म एक बार फिर हाजिर है आइए जानते हैं इस बार क्या ये फिल्म कॉमेडी का जादू बिखेर पाई है या नहीं।

कहानी
फिल्म की शुरुआत 100 साल पुराने खजाने और उसके गुम हुए नक्शे की कहानी से होती है। अधूरा (रवि किशन) खुद को समुद्र का सबसे बड़ा डाकू मानता है, जबकि पृथ्वी (उपेंद्र लिमये) की यादों में खजाने का सबसे बड़ा राज छिपा होता है। जैसे ही यह रहस्य सामने आता है, गुड्डू (अजय देवगन), आदि (अरशद वारसी), मानव (जावेद जाफरी), लल्लन (रितेश देशमुख) समेत कई लोग खजाने की तलाश में निकल पड़ते हैं। सफर उन्हें एक रहस्यमयी द्वीप तक ले जाता है, जहां रोमांच से ज्यादा कॉमेडी, अफरा-तफरी और भागदौड़ देखने को मिलती है। इंटरवल तक कहानी खजाने की खोज, किरदारों की नोकझोंक और गुड्डू-ईशा गुप्ता के रोमांटिक ट्रैक के इर्द-गिर्द घूमती है।

एक्टिंग
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट है। अजय देवगन अपने सिग्नेचर अंदाज में सहज नजर आते हैं और अपने किरदार को बिना ज्यादा मेहनत के निभाते हैं। अरशद वारसी और जावेद जाफरी की कॉमिक टाइमिंग कई फीके दृश्यों में भी जान डाल देती है। रितेश देशमुख भी अपने मस्तीभरे अंदाज से मनोरंजन करते हैं। रवि किशन और संजय मिश्रा को सीमित स्क्रीन टाइम मिला है, लेकिन दोनों अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। अंजलि आनंद का स्क्रीन प्रेजेंस प्रभावशाली है। ईशा भी अच्छी लग रही हैं। वहीं अन्य किरदारों ने भी अपने काम के साथ न्याय किया है।

डायरेक्शन
निर्देशक इंदर कुमार ने 'धमाल' फ्रेंचाइजी की पुरानी पहचान को बनाए रखने की कोशिश की है और पूरा फोकस हल्की-फुल्की कॉमेडी पर रखा है। फिल्म में ट्रेजर हंट का वही पुराना फॉर्मूला दोबारा इस्तेमाल किया गया है, जिससे कहानी में नयापन महसूस नहीं होता है। कमजोर वीएफएक्स, दोहराए गए जोक्स और ढीली पटकथा फिल्म की रफ्तार को प्रभावित करते हैं। कुल मिलाकर निर्देशन मनोरंजन देने की कोशिश करता है, लेकिन पूरी तरह सफल नहीं रहता है।
