हर उम्र का आदमी गिर गया है .... PM मोदी की ढाल बने Anupam Kher, प्रदर्शन के दौरान अपशब्द बोलने वाले पर भड़के

punjabkesari.in Monday, Jul 27, 2026 - 12:12 PM (IST)

Anupam Kher : नीट पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का विरोध-प्रदर्शन कई दिनों तक जारी रहा। आखिरकार 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कई फ़िल्मी हस्तियों ने छात्रों की हिम्मत की और व्यवस्था से जवाबदेही तय करने की मांग का समर्थन किया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को संबोधित करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का भरोसा दिया। 

इसी बीच अभिनेता अनुपम खेर ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा की लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनी जानत सकारात्मक बात है और आंदोलन के नतीजे को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जीत बताया। हालांकि, उन्होंने प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक और अभद्र भाषा पर नाराजगी जताई।  सोशल मीडिया पर वायरल हुए उन वीडियो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि असहमति जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के नाम पर मर्यादा नहीं खोनी चाहिए।

अनुपमा खेर ने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि-
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हमारी आवाज़ है लेकिन उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती हमारी भाषा है। असहमति ज़रूरी है, सवाल पूछना भी ज़रूरी है। सरकारों को जवाबदेह बनाना भी ज़रूरी है लेकिन अगर हम अपनी भाषा की मर्यादा खो देंगे, तो हमारी बात की ताकत भी कम हो जाएगी।
यह वीडियो किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में नहीं है। यह उस संस्कृति के पक्ष में है जहाँ विचारों का संघर्ष हो सकता है, लेकिन शब्दों का पतन नहीं।
मतभेद रखें… लेकिन मर्यादा भी रखें। क्योंकि एक सभ्य समाज की पहचान केवल उसके विचारों से नहीं, बल्कि उन्हें व्यक्त करने के तरीके से भी होती है। जय हिन्द! वंदे मातरम्।  

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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देश आंदोलन पर ही नहीं रुक सकता  
अनुपम खेर ने आगे कहा की अब समय आ गया है कि देश इस आंदोलन से आगे बढे क्योंकि किसी एक मुद्दे पर राष्ट्र हमेशा नहीं ठहर सकता। उनके मुताबिक, देश को आगे बढ़ते हुए भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा की पूरे घटनाक्रम में एक बात ने उन्हें सबसे ज्यादा आहत किया। उनका कहना था कि सार्वजानिक मंचों और कैमरों के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जिस तरह की घटिया और असम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसे देखकर उन्हें काफी दुःख हुआ। 

उन्होंने कहा कि किसी भी नेता से असहमति रखना, उनसे सवाल पूछना या उनकी नीतियों की आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विरोध जताने के दौरान भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उनके अनुसार, समाज को आने वाली पीढ़ियों के लिए सम्मानजनक संवाद की संस्कृति छोड़कर जानी चाहिए।

 


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Content Editor

Prachi Sharma

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