मैं बिल्कुल ठीक हूं...ICU वाले ब्लॉग पर Amitabh Bachchan ने तोड़ी चुप्पी, बोलें- मेरी पोस्ट को गलत समझा गया
punjabkesari.in Thursday, Jul 23, 2026 - 10:44 AM (IST)
Amitabh Bachchan : बॉलीवुड के महानायक अभिनेता बच्चन अपने ब्लॉग के जरिए अक्सर फैंस से जुड़ते रहते हैं। हाल ही में उनके एक ब्लॉग में सर्जरी और आईसीयू का जिक्र होने के बाद सोशल मीडिया पर ऊके स्वास्थ्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगने लगीं। कई लोगों ने मान लिया कि बिग बी की तबीयत बिगड़ गई है और उनकी सर्जरी हुई है। हालांकि, इन सभी खबरों पर विराम लगाते हुए अमिताभ बच्चन ने एक नया ब्लॉग शेयर किया और स्पष्ट किया कि उनके पुराने पोस्ट को गलत तरीके से समझा गया। उन्होंने साफ किया कि उनकी कोई सर्जरी नहीं हुई और वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।

'मैं ठीक हूं...'
अमिताभ बच्चन ने अपने नए ब्लॉग में स्पष्ट किया कि उनकी तबीयत पूरी तरह ठीक है और उनकी कोई सर्जरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि उनके पिछले ब्लॉग का गलत मतलब निकाला गया। बिग बी के अनुसार, उन्हेआने सर्जरी और आईसीयू का जिक्र केवल उदाहरण के तौर पर किया था। उनका मतलबफीफा वर्ल्ड कप फाइनल में अर्जेंटीना की हार से था।
अभिनेता ने लिखा कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और लोगों ने उनके शब्दों को गलत समझा लिया। उन्होंने समझाया कि सर्जरी या आईसीयू से घर लौटने के बाद व्यक्ति के लिए अपनी कमजोरी से उबरना सबसे कठिन होता है। इसी तरह किसी चैंपियन क लिए हार के बाद खुद को संभालना भी सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसी भाव को समझाने के लिए उन्होंने यह उदाहरण दिया था।
जिंदगी ऐसी ही है, यह हमेशा चलता रहेगा
अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में आगे कहा की उनका आशय खुद से नहीं बल्कि एक उदाहरण के जरिए अपनी बात समझाने का था। उन्होंने अर्जेंटीना की हार और लियोनेल मेसी का जिक्र करते हुए बताया कि कई लोगों ने उनके शब्दों को उनकी निजी स्थिति से जोड़ लिया, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं था।

बिग बी ने लिखा कि हर चैंपियन को यह स्वीकार करना पड़ता है कि समय के साथ कोई नया विजेता सामने आता है। किसी भी सफल इंसान के लिए यह मानना आसान नहीं होता कि अब उनकी जगह कोई और ले चुका है लेकिन यही जिंदगी का सच है। बदलाव जीवन का नियम है और यह सिलसिला हमेशा चलता रहता है।
अमिताभ बच्चन ने अपने ब्व्लॉग में आगे समझाया कि यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी के इलाज या सर्जरी के लिए अस्पताल जाता है तो इलाज के बाद भले ही बीमारी दूर हो जाए लेकिन शरीर को पहले जैसी स्थिति में लौटने में समय लगता है। ऐसे दौर में व्यक्ति को अपनी शारीरिक कमजोरी और आए बदलावों को स्वीकार करना सबसे कठिन लगता है, भले ही पहले जैसा पूरी तरह न बन पाए।
