Narad Jayanti Katha : आखिर किस तरह ब्रह्मा के मानस पुत्र कहलाए नारद मुनि ? जानें इसके पीछे की कथा

punjabkesari.in Saturday, May 02, 2026 - 07:54 AM (IST)

Narad Jayanti Katha : हिंदू धर्म में नारद जंयती का बहुत विशेष महत्व है। हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष द्वितिया तिथि को नारद जयंती मनाई जाती है। इस बार नारद जयंती 2 मई यानी आज के दिन मनाई जा रही है। नारद जी को ब्रह्मांड का सबसे पहला पत्रकार माना जाता है। क्योंकि नारद जी देवी-देवताओं और राजाओं को सूचनाओं का आदान प्रदान करते थे। माना जाता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ नारद जी की पूजा करने से हर कार्य में सफलता मिलती है और मन की हर मुराद पूरी होती है। कहा जाता है कि नारद मुनि का जन्म एक श्राप के कारण हुआ था। तो आइए जानते हैं कि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र कहलाने की कथा के बारे में-

Narad Jayanti Katha

नारद जयंती कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नारद मुनि को भगवान ब्रह्मा का “मानस पुत्र” कहा जाता है। माना जाता है की इस स्थान तक पहुंचने की उनकी यात्रा बिल्कुल आसान नहीं थी। इसके पीछे गहरी तपस्या और कई जन्मों की कहानी छिपी हुई है।  कथा के अनुसार, अपने एक पूर्व जन्म में नारद मुनि गंधर्व कुल में उत्पन्न हुए थे और उनका नाम उपबर्हण था। वे अत्यंत सुंदर और आकर्षक थे, लेकिन इसी कारण उन्हें अपने रूप और वैभव का काफी अभिमान भी था। एक बार जब गंधर्व और अप्सराएं भगवान ब्रह्मा की आराधना में लीन थीं, तब उपबर्हण वहां अत्यधिक श्रृंगार करके स्त्रियों के साथ पहुंचे। उनकी इस हरकत को देखकर ब्रह्मा जी नाराज हो गए और उन्होंने क्रोध में आकर उपबर्हण को श्राप दे दिया कि अगले जन्म में उन्हें निम्न योनि में जन्म लेना पड़ेगा। श्राप के प्रभाव से उनका अगला जन्म एक दासी के पुत्र के रूप में हुआ। जीवन की शुरुआत ही संघर्षों से भरी थी- बाल्यावस्था में ही उनकी माता का देहांत हो गया। इस घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्होंने संसारिक मोह-माया से दूर होकर भगवान की भक्ति का मार्ग अपना लिया।

Narad Jayanti Katha

एक दिन वे एक वृक्ष के नीचे बैठकर गहन ध्यान में लीन थे, तभी उन्हें भगवान के दिव्य स्वरूप की एक झलक मिली। हालांकि वह दर्शन क्षणभर के लिए ही था, लेकिन उसी अनुभव ने उनके भीतर प्रभु को पूर्ण रूप से प्राप्त करने की तीव्र इच्छा जगा दी। इसके बाद उन्होंने कठोर तपस्या शुरू कर दी। कहा जाता है कि उनकी साधना से प्रसन्न होकर आकाशवाणी हुई, जिसमें बताया गया कि इस जन्म में उन्हें भगवान के साक्षात दर्शन तो नहीं होंगे, लेकिन अगले जन्म में वे उनके समीप स्थान प्राप्त करेंगे।इसी तप और भक्ति के फलस्वरूप, अगले जन्म में वे भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र के रूप में प्रकट हुए और समस्त लोकों में “देवऋषि नारद” के नाम से विख्यात हुए। उनकी पहचान एक महान भक्त, ज्ञानवान ऋषि और भगवान के दूत के रूप में स्थापित हुई।

Narad Jayanti Katha

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Sarita Thapa

Related News