देवशयनी एकादशी के बाद मांगलिक कार्यों पर क्यों लग जाता है विराम, जानिए चातुर्मास में शुभ कार्यों पर रोक की असली वजह

punjabkesari.in Saturday, Jul 25, 2026 - 11:50 AM (IST)

Why Weddings Stop in Chaturmas : सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का बहुत खास महत्व है। इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। इस चार महीने की अवधि को ही चातुर्मास कहा जाता है। इस तिथि के आते ही देश भर में शादियां, मुंडन, गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत जैसे सभी शुभ व मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह से विराम लग जाता है। यह रोक अगले चार महीनों यानी चातुर्मास तक जारी रहती है। कई लोग यह सोचते हैं कि इस चार महीने की अवधि के दौरान शुभ कार्यों पर रोक क्यों लग जाता है। तो आइए जानते हैं इसके पीछे जी असली वजह के बारे में-

धर्मिक कारण
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु राजा बलि के आग्रह पर पाताल लोक में चार महीने के लिए विश्राम करने चले जाते हैं। इस काल को उनकी योग निद्रा कहा जाता है। चूंकि किसी भी मांगलिक कार्य के सफल होने के लिए भगवान विष्णु के आशीर्वाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, इसलिए उनके शयन काल में रहने के कारण इन चार महीनों में कोई भी नया या बड़ा शुभ कार्य नहीं किया जाता। जब भगवान कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी को जागते हैं, तब दोबारा से शहनाइयां गूंजने लगती हैं।

आध्यात्मिक कारण
सनातन परंपरा के अनुसार, इन चार महीनों में ऊर्जा को बचाकर ध्यान, जप, तप और मानसिक शुद्धि में लगाना चाहिए। मांगलिक कार्यों में बहुत अधिक मानसिक और शारीरिक ऊर्जा खर्च होती है, जिससे व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक यात्रा से भटक सकता है। इसलिए ऋषियों ने इस समय को आत्म-साधना के लिए आरक्षित किया।

कब से कब तक रहेगा चातुर्मास?
पंचांग के अनुसार, चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होती है। वहीं, इसका समापन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर होता है। इस बार चातुर्मास 25 जुलाई 2026 से शुरू होगा और 20 नवंबर 2026 को समाप्त होगा।

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Content Editor

Sarita Thapa

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