15 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है इंजीनियर्स डे? जानें विश्वेश्वरैया से जुड़ा बड़ा कारण

punjabkesari.in Monday, Sep 14, 2026 - 11:01 AM (IST)

Why Engineers Day Celebrated on 15 September : 15 सितंबर को भारत में इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। यह दिन देश के महान इंजीनियर और भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। उन्हें प्यार से सर एम. विश्वेश्वरैया भी कहा जाता है। उनका जीवन इस बात की मिसाल है कि अगर सोच बड़ी हो, मेहनत सच्ची हो और अपने काम के प्रति लगन हो, तो एक व्यक्ति देश के विकास में बड़ा योगदान दे सकता है।

Why Engineers Day Celebrated on 15 September

कौन थे सर एम. विश्वेश्वरैया?
सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के मुद्देनहल्ली में हुआ था। बचपन से ही वे पढ़ाई को लेकर बहुत गंभीर थे। आगे चलकर उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और अपने ज्ञान व मेहनत के बल पर देश के प्रमुख इंजीनियरों में अपना नाम बनाया। उस दौर में भारत में आधुनिक इंजीनियरिंग और बड़े निर्माण कार्य आज की तरह विकसित नहीं थे। ऐसे समय में विश्वेश्वरैया ने पानी, सिंचाई, बांध और बाढ़ नियंत्रण जैसी समस्याओं के समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम किया।

पानी को बचाने की अनोखी तकनीक
विश्वेश्वरैया का सबसे महत्वपूर्ण योगदान जल प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में माना जाता है। उन्होंने ऐसी तकनीकों पर काम किया, जिनसे पानी को बेहतर तरीके से जमा किया जा सके और जरूरत के अनुसार उसका इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने खडग़वासला बांध में पानी के स्तर को नियंत्रित करने के लिए विशेष प्रकार के स्वचालित गेट विकसित किए। इस तकनीक ने बांध में पानी के प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद की। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें इंजीनियरिंग की दुनिया में खास पहचान दिलाई।

कृष्णराज सागर बांध से बदली तस्वीर
मैसूर में कृष्णराज सागर बांध के निर्माण में भी विश्वेश्वरैया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कावेरी नदी पर बने इस बांध ने सिंचाई, पेयजल और बिजली जैसी जरूरतों को पूरा करने में मदद की। उस समय इतने बड़े जलाशय की योजना और निर्माण अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती थी। इस परियोजना ने आसपास के क्षेत्रों के विकास को भी गति दी। आज भी इस बांध को भारत के महत्वपूर्ण जल संसाधन प्रोजैक्ट्स में गिना जाता है।

Why Engineers Day Celebrated on 15 September

बाढ़ से बचाव के लिए किया काम
विश्वेश्वरैया ने केवल बांधों और सिंचाई के क्षेत्र में ही काम नहीं किया, बल्कि बाढ़ नियंत्रण की समस्याओं पर भी ध्यान दिया। हैदराबाद में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद उन्होंने शहर को बाढ़ से बचाने के उपायों पर काम किया। उनके सुझावों के आधार पर बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी से जुड़ी योजनाएं तैयार की गईं।उनका मानना था कि इंजीनियरिंग का उद्देश्य सिर्फ बड़ी इमारतें या पुल बनाना नहीं है, बल्कि ऐसी समस्याओं का समाधान करना भी है, जिससे आम लोगों का जीवन बेहतर बन सके।

मैसूर के विकास में अहम भूमिका
साल 1912 से 1918 तक विश्वेश्वरैया मैसूर रियासत के दीवान रहे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, उद्योग, सिंचाई और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर जोर दिया। उनके प्रयासों से मैसूर में औद्योगिक और शैक्षणिक विकास को नई दिशा मिली। वे चाहते थे कि भारत केवल प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर न रहे, बल्कि विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और उद्योग के क्षेत्र में भी आगे बढ़े।

अनुशासन था उनकी ताकत
विश्वेश्वरैया अपनी मेहनत और अनुशासन के लिए भी प्रसिद्ध थे। वे समय की बहुत कद्र करते थे और अपने काम को पूरी ईमानदारी से करते थे। उनका जीवन बच्चों को सिखाता है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि नियमित मेहनत, अनुशासन और सीखने की इच्छा से भी मिलती है। उनका एक प्रसिद्ध विचार था कि ‘देश की तरक्की के लिए लोगों को शिक्षा, मेहनत और बेहतर तकनीक की ओर बढ़ना चाहिए।’

भारत रत्न से हुए सम्मानित
देश के विकास में उनके असाधारण योगदान के लिए 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। लंबे और शानदार जीवन के बाद 1962 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनके विचार और उनके काम आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।

बच्चों के लिए क्या है सीख?
सर एम. विश्वेश्वरैया की कहानी हमें बताती है कि इंजीनियर केवल मशीनें या इमारतें बनाने वाला व्यक्ति नहीं होता। एक इंजीनियर अपने ज्ञान और कल्पना का इस्तेमाल करके लोगों की समस्याओं का समाधान खोज सकता है। अगर आपको चीजों को समझना, सवाल पूछना, कुछ नया बनाना और मुश्किल समस्याओं का हल ढूंढना पसंद है, तो आपके अंदर भी एक इंजीनियर छिपा हो सकता है!

इस इंजीनियर्स डे पर एक संकल्प लें :
‘‘सीखेंगे, सवाल पूछेंगे, नई चीजें बनाएंगे और अपनी मेहनत से देश को बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे।’’

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Content Editor

Sarita Thapa

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