Why Blessing By Right Hand : आशीर्वाद या एनर्जी ट्रांसफर ? जानें क्यों केवल दाहिने हाथ में ही होती है ब्रह्मांडीय ऊर्जा को देने की शक्ति
punjabkesari.in Thursday, Feb 19, 2026 - 11:54 AM (IST)
Why Blessing By Right Hand : भारतीय संस्कृति में बड़ों के चरण स्पर्श करना और बदले में उनके हाथ का सिर पर टिकना एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसे हम बचपन से देखते आ रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि आशीर्वाद हमेशा दाहिने हाथ से ही क्यों दिया जाता है। अक्सर हम इसे केवल एक शिष्टाचार या सीधे हाथ को शुभ मानने की परंपरा मान लेते हैं, परंतु प्राचीन भारतीय ऋषियों और योग विज्ञान के अनुसार इसके पीछे एक अत्यंत गहरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण छिपा है। दरअसल, हमारा शरीर ऊर्जा का एक अद्भुत पावरहाउस है। योग शास्त्र की मानें तो हमारे शरीर का दाहिना हिस्सा सूर्य ऊर्जा से संचालित होता है, जो तेज, शक्ति और सकारात्मकता का केंद्र है। जब कोई सिद्ध पुरुष या घर के बुजुर्ग अपना दाहिना हाथ आपके सिर पर रखते हैं, तो वह केवल एक स्पर्श नहीं होता, बल्कि उनके भीतर संचित सकारात्मक तरंगों का आपके शरीर में एनर्जी ट्रांसफर होता है। तो आइए जानते हैं कि दाहिने हाथ से आशीर्वाद देने के पीछे की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण के बारे में-

पिंगला नाड़ी और सौर ऊर्जा
योग शास्त्र के अनुसार, हमारे शरीर में ऊर्जा के तीन मुख्य मार्ग होते हैं- इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना। हमारे शरीर का दाहिना हिस्सा पिंगला नाड़ी से संचालित होता है। पिंगला नाड़ी सीधे तौर पर सूर्य की ऊर्जा, तेज और जीवन शक्ति से जुड़ी होती है। जब कोई व्यक्ति दाहिने हाथ से आशीर्वाद देता है, तो वह अपने भीतर संचित सकारात्मक 'सौर ऊर्जा' को सामने वाले व्यक्ति में संचारित करता है।
ऊर्जा का 'एक्सपोर्टर' है दाहिना हाथ
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से मानव शरीर एक चुंबकीय क्षेत्र की तरह काम करता है।
दाहिना हिस्सा : यह हिस्सा ऊर्जा को बाहर की ओर भेजने के लिए बना है। इसलिए दान देना, आहुति देना या आशीर्वाद देना हमेशा दाहिने हाथ से किया जाता है।
बायां हिस्सा : यह ऊर्जा को भीतर ग्रहण करने के लिए होता है। यही कारण है कि आशीर्वाद देने के लिए दाहिने हाथ और आशीर्वाद लेने के लिए सिर का चुनाव किया गया है।

एनर्जी सर्किट का पूरा होना
आशीर्वाद की प्रक्रिया एक इलेक्ट्रिक सर्किट की तरह काम करती है। जब आशीर्वाद लेने वाला व्यक्ति झुककर चरण स्पर्श करता है, तो उसका अहंकार शून्य हो जाता है और वह ऊर्जा ग्रहण करने के लिए रिसेप्टिव मोड में आ जाता है। जैसे ही आशीर्वाद देने वाला अपना दाहिना हाथ सामने वाले के सिर पर रखता है, ऊर्जा का प्रवाह पूरा हो जाता है। यह ऊर्जा व्यक्ति के मानसिक तनाव को कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है।
हथेली के चक्र और अभय मुद्रा
हमारी हथेलियों के केंद्र में सूक्ष्म ऊर्जा चक्र होते हैं। आशीर्वाद देते समय हाथ को अभय मुद्रा में रखा जाता है। इस मुद्रा में उंगलियों के पोरों से ब्रह्मांडीय ऊर्जा एक लेजर बीम की तरह निकलती है, जो प्राप्तकर्ता के सुरक्षा चक्र को मजबूत करती है।
क्या बायां हाथ अशुभ है ?
बायां हाथ अशुभ नहीं है, बल्कि उसका कार्य अलग है। बायां हिस्सा इड़ा नाड़ी से जुड़ा है, जो शीतलता और अंतर्मुखी ऊर्जा का प्रतीक है। यह स्वयं की शांति और ध्यान के लिए उत्तम है, लेकिन ऊर्जा को दूसरों तक पहुंचाने के लिए दाहिना हाथ यानी सूर्य स्वर ही सबसे प्रभावशाली होता है।

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