Wedding Card Vastu : शादी का कार्ड बनवाते समय न करें ये भूल, वरना बिगड़ सकता है वैवाहिक सुख

punjabkesari.in Friday, Jan 23, 2026 - 05:35 PM (IST)

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Wedding Card Vastu : हिंदू धर्म में विवाह को केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र संगम और एक आध्यात्मिक बंधन माना जाता है। इस मांगलिक कार्य की शुरुआत विवाह निमंत्रण पत्र से होती है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, शादी का कार्ड केवल सूचना देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह वह पहली सकारात्मक ऊर्जा है जो आपके मेहमानों तक पहुंचती है। यदि विवाह का कार्ड वास्तु सम्मत हो, तो विवाह निर्विघ्न संपन्न होता है और वर-वधू का भावी जीवन सुखमय रहता है। आइए जानते हैं शादी का कार्ड छपवाते समय किन वास्तु नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
 

कार्ड का रंग:
वास्तु शास्त्र में रंगों का विशेष महत्व है। शादी का कार्ड खुशी और उमंग का प्रतीक है इसलिए रंगों का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। वास्तु के अनुसार, लाल रंग प्रेम और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि पीला रंग शुभता और ज्ञान का। इन रंगों के कार्ड सबसे उत्तम माने जाते हैं। ये रंग आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाते हैं और मंगलकारी माने जाते हैं। कभी भी काले, गहरे भूरे या ग्रे रंग के कार्ड नहीं छपवाने चाहिए। ये रंग राहु और शनि के प्रतीक माने जाते हैं, जो मांगलिक कार्यों में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।

Wedding Card Vastu

प्रथम पूज्य गणेश जी का स्थान
सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से होती है। कार्ड पर भगवान गणेश की छवि या रिद्धि-सिद्धि का प्रतीक होना अनिवार्य है। वास्तु के अनुसार, गणेश जी की तस्वीर ऐसी होनी चाहिए जिसमें उनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी हो। इसे सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है। ध्यान रखें कि कार्ड के फटने या फेंकने की स्थिति में भगवान का अपमान न हो, इसलिए आजकल कई लोग कार्ड के ऊपर एक अलग छोटा लिफाफा या स्टीकर लगवाते हैं।

 कार्ड की आकृति और किनारों का ध्यान
वास्तु के अनुसार, किसी भी वस्तु की आकृति उसकी ऊर्जा निर्धारित करती है। शादी का कार्ड हमेशा चौकोर या आयताकार होना चाहिए। यह स्थिरता और संतुलन का प्रतीक है। आजकल स्टाइलिश दिखने के चक्कर में लोग कार्ड के कोनों को अजीबोगरीब तरीके से कटवाते हैं। वास्तु के अनुसार, नुकीले या त्रिकोणीय कोने शर ऊर्जा पैदा करते हैं। कार्ड के किनारे समतल और सुव्यवस्थित होने चाहिए।

शब्दों का चयन और भाषा की शुद्धता
कार्ड पर लिखे जाने वाले शब्द सकारात्मक और सम्मानजनक होने चाहिए। कार्ड की शुरुआत ॐ गणेशाय नमः या कुलदेवता के स्मरण से करें। विवाह की तिथि, समय और स्थान स्पष्ट अक्षरों में लिखें। वास्तु अनुसार, स्पष्टता से जीवन में भ्रम कम होता है। कार्ड की सजावट में युद्ध, कांटेदार वृक्ष या हिंसक पशुओं के चित्र नहीं होने चाहिए।

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कार्ड वितरण की दिशा और समय
वास्तु शास्त्र केवल कार्ड बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके वितरण पर भी लागू होता है।

पहला कार्ड किसे दें ? सबसे पहला निमंत्रण पत्र हमेशा भगवान गणेश अर्पित करना चाहिए। इसके बाद अपने कुलदेवता और पितरों को आमंत्रित करें। यदि संभव हो, तो कार्ड बांटने की शुरुआत ईशान कोण या पूर्व दिशा से करनी चाहिए। यह दिशा सफलता और प्रगति की कारक है। कार्ड बांटने की शुरुआत हमेशा किसी शुभ चौघड़िया या तिथि में ही करनी चाहिए।

निमंत्रण के साथ कुछ मीठा
वास्तु और भारतीय परंपरा के अनुसार, खाली हाथ निमंत्रण देना शुभ नहीं माना जाता। कार्ड के साथ मिठाई, मिश्री या सूखे मेवे देना सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। यह न केवल आपके रिश्तों में मिठास घोलता है, बल्कि कुंडली के बुध और बृहस्पति को भी मजबूत करता है, जिससे वैवाहिक जीवन में तालमेल बना रहता है।

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Content Editor

Prachi Sharma

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