Water Tank Vastu : पानी की टंकी लगाने से पहले जान लें ये वास्तु नियम, नहीं आएंगी बाधाएं
punjabkesari.in Wednesday, Feb 04, 2026 - 03:10 PM (IST)
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Water Tank Vastu : हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में 'जल' को पंचतत्वों में से एक महत्वपूर्ण तत्व माना गया है। पानी की दिशा और स्थान का सीधा संबंध घर की आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य और मानसिक शांति से होता है। अक्सर लोग घर बनवाते समय कमरों और रसोई पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन पानी की टंकी कहीं भी रखवा देते हैं। वास्तु के अनुसार, गलत दिशा में रखी गई पानी की टंकी भारी आर्थिक नुकसान, बीमारियों और परिवार में कलह का कारण बन सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि छत पर या जमीन के नीचे पानी की टंकी लगवाने के क्या नियम हैं।

छत पर पानी की टंकी के लिए नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार, छत पर पानी की टंकी रखने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है। यह दिशा भारीपन के लिए शुभ है। यहां टंकी होने से घर के मुखिया का प्रभाव बढ़ता है और परिवार में स्थिरता आती है।
यदि दक्षिण-पश्चिम में जगह न हो, तो आप दक्षिण या पश्चिम दिशा का चुनाव भी कर सकते हैं। पश्चिम दिशा वरुण देव की दिशा मानी जाती है, इसलिए यहां टंकी रखना लाभदायक होता है।
Never place the water tank here भूलकर भी यहां न रखें टंकी:
उत्तर-पूर्वी कोना जल तत्व का तो है, लेकिन छत पर यह कोना हल्का होना चाहिए। यहाँ भारी टंकी रखने से मानसिक तनाव और आर्थिक हानि होती है। घर के ठीक बीचों-बीच कभी भी भारी टंकी न रखवाएं। यह जीवन में अस्थिरता पैदा करता है।
भूमिगत पानी की टंकी के नियम
जमीन के नीचे टैंक या बोरवेल बनवाने के नियम छत वाली टंकी से बिल्कुल अलग होते हैं क्योंकि यहां जमीन की खुदाई की जाती है। जमीन के नीचे पानी का टैंक बनाने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा सबसे शुभ है। यह दिशा धन आगमन और वंश वृद्धि में सहायक होती है। यदि ईशान कोण में जगह न हो, तो उत्तर या पूर्व दिशा भी शुभ मानी जाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
दक्षिण-पश्चिम में कभी भी गड्ढा या अंडरग्राउंड टैंक न बनवाएं। इससे परिवार के मुखिया को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं या अकाल मृत्यु का भय रह सकता है।

टंकी के रंग का महत्व
वास्तु शास्त्र में रंगों का विशेष महत्व है। टंकी का रंग चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें-
सफेद रंग: शांति और शुद्धता का प्रतीक है, यह उत्तर-पूर्व की टंकियों के लिए अच्छा है।
नीला रंग: जल तत्व को दर्शाता है और सकारात्मकता बढ़ाता है।
जहां तक हो सके, गहरे काले रंग की टंकी से बचें, क्योंकि यह सूर्य की किरणों को अधिक सोखती है और वास्तु के अनुसार भी इसे बहुत शुभ नहीं माना जाता।
पानी की टंकी से जुड़े अन्य जरूरी वास्तु टिप्स
यदि टंकी या पाइप से पानी टपक रहा है, तो इसे तुरंत ठीक कराएं। वास्तु के अनुसार, पानी का टपकना सीधे तौर पर 'पैसे का बहना' माना जाता है। इससे फिजूलखर्ची बढ़ती है।
टंकी की सफाई: गंदगी नकारात्मक ऊर्जा को जन्म देती है। समय-समय पर टंकी की सफाई सुनिश्चित करें। गंदा पानी राहु के दोष को बढ़ाता है।
दूरी का ध्यान: पानी की टंकी और रसोई घर (चूल्हा) एक ही दीवार से सटे हुए नहीं होने चाहिए। अग्नि और जल का मेल वास्तु दोष उत्पन्न करता है।
प्लास्टिक की टंकी: यदि संभव हो, तो प्लास्टिक की जगह कंक्रीट या सीमेंट की टंकी बनवाएं, लेकिन अगर प्लास्टिक की है, तो वह अच्छी गुणवत्ता की होनी चाहिए।

