Visit Vrindavan: आइए करें, राधा कृष्ण की प्रेम नगरी का दर्शन

2021-08-30T09:16:43.73

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Visit Vrindavan: वृंदावन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित एक ऐतिहासिक शहर है। हिंदू धर्म के अनुसार, भगवान कृष्ण ने अपने बचपन के दिन यहीं बिताए थे। यह शहर मथुरा से लगभग 15 कि.मी. दूर है। वृन्दावन वह जगह है जहां श्री कृष्ण ने महारस रचाई थी। यहां के कण-कण में राधा-कृष्ण के प्रेम की आध्यात्मिक धारा बहती है। वृन्दावन में जन्माष्टमी मथुरा से अगले दिन मनाई जाती है तथा छप्पन भोग लगाया जाता है, जिसे देखने दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के समय भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और झांकियों को देखने के लिए यहां भारी भीड़ जुटती है।

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What is the mystery of Vrindavan आज भी रास रचाते हैं श्री कृष्ण
वृंदावन स्थित निधि वन के बारे में मान्यता है की यहां आज भी हर रात भगवान कृष्ण गोपियों संग रास रचाते हैं। यही कारण है की सुबह खुलने वाले निधि वन को संध्या आरती के पश्चात बंद कर दिया जाता है। उसके बाद वहां कोई नहीं रहता, यहां तक कि कहते हैं निधिवन में दिन में रहने वाले पशु-पक्षी भी संध्या होते ही निधि वन को छोड़कर चले जाते हैं।

कहते हैं कि यदि कोई छुपकर रासलीला देखने की कोशिश करता है तो पागल हो जाता है। ऐसे ही एक पागल बाबा की समाधि निधि वन में बनी हुई है। कहा जाता है की उन्होंने एक बार निधि वन में छुपकर रास लीला देखने की कोशिश की थी, जिससे वह पागल हो गए थे। चूंकी वह भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त थे, इसलिए उनकी मृत्यु के पश्चात मंदिर कमेटी ने निधि वन में ही उनकी समाधि बनवा दी।

निधि वन के अंदर है ‘रंग महल’, जिसके बारे में मान्यता है की रोज रात यहां पर राधा और कन्हैया आते हैं। रंग महल में राधा और कन्हैया के लिए रखे गए चंदन के पलंग को शाम सात बजे से पहले सजा दिया जाता है। पलंग के बगल में एक लोटा पानी, राधाजी के श्रृंगार का सामान और दातुन संग पान रख दिया जाता है।

कहते हैं सुबह पांच बजे जब ‘रंग महल’ का पट खुलता है तो बिस्तर अस्त-व्यस्त, लोटे का पानी खाली, दातुन कुचली हुई और पान खाया हुआ मिलता है। रंगमहल में भक्त केवल श्रृंगार का सामान ही चढ़ाते हैं और प्रसाद स्वरूप उन्हें भी श्रृंगार का सामान ही मिलता है।

निधि वन की एक अन्य खासियत है यहां के तुलसी के पौधे जोड़ों में हैं। इसके पीछे यह मान्यता है कि जब राधा संग भगवान कृष्ण वन में रास रचाते हैं, तब यही जोड़ेदार पौधे गोपियां बन जाते हैं। जैसे ही सुबह होती है, सब फिर तुलसी के पौधों में बदल जाते हैं, जिनकी कोई एक डंडी भी नहीं ले जा सकता। लोग बताते हैं कि जिन लोगों ने ऐसा किया, वे किसी न किसी आपदा का शिकार हो गए। इसलिए कोई भी इन्हें नहीं छूता।
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Where is real Vrindavan located वृंदावन धाम का इतिहास
15वीं शताब्दी (1515) में चैतन्य महाप्रभु ने अपनी ब्रज यात्रा के समय वृन्दावन तथा भगवान कृष्ण कथा से संबंधित अन्य स्थानों को अपने अंतर्ज्ञान से पहचाना था। रासस्थली, वंशीवट से युक्त वृन्दावन सघन वनों में लुप्त हो गया था।

माना जाता है कि अपनी आध्यात्मिक शक्ति के द्वारा वे भगवान कृष्ण के अतीत के सभी महत्वपूर्ण स्थानों का वृंदावन में और आसपास पता लगाने में सफल हुए। इसके बाद मीराबाई भी मेवाड़ राज्य छोड़ कर वृंदावन आ गई थीं।

यह भी कहा जाता है कि वर्तमान वृन्दावन असली या प्राचीन वृन्दावन नहीं है। श्रीमद्भागवत के वर्णन तथा अन्य उल्लेखों से जान पड़ता है कि प्राचीन वृन्दावन गोवर्धन के निकट था। गोवर्धन-धारण की प्रसिद्ध कथा की स्थली वृन्दावन पारसौली (परम रासस्थली) के निकट थी। महाकवि सूरदास इसी ग्राम में दीर्घकाल तक रहे थे। सूरदास जी ने वृन्दावन रज की महिमा के वशीभूत होकर गाया है-‘हम ना भई वृन्दावन रेणु।’
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Vrindavan Tourism 2021 कुछ रोचक तथ्य
वृन्दावन तीन ओर से यमुना नदी से घिरा हुआ है और इसकी प्राकृतिक छटा बहुत निराली है।
वृंदावन को ‘विधवाओं के शहर’ के रूप में भी जाना जाता है, जिनकी यहां बड़ी संख्या है और विधवा आश्रम भी हैं।
वृंदावन की खासियत यह है कि यहां अनेक ऐतिहासिक धरोहरें, सैंकड़ों आश्रम और कई गौशालाएं हैं।

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Best of Vrindavan वृन्दावन में घूमने की जगहें
यह एक ऐसा शहर है जहां छोटे-बड़े हजारों मंदिर स्थित हैं। यहां पूरे साल पर्यटक आते हैं। वृंदावन में घूमने की प्रमुख जगहें निम्नलिखित हैं :
Banke Bihari Temple बांके बिहारी मंदिर
वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित देश के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है। यह मंदिर राजस्थानी शैली में बना है और इसमें भगवान कृष्ण की छवि एक शिशु के रूप में दिखाई गई है।

Prem Mandir प्रेम मंदिर
वृंदावन में स्थित भव्य प्रेम मंदिर राधा-कृष्ण और सीता-राम को समर्पित है। सफेद संगमरमर से निर्मित और बहुत जटिल नक्काशी से सजा यह मंदिर अपनी स्थापत्य सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है।

Iskcon temple इस्कॉन मंदिर
इस्कॉन मंदिर श्री कृष्ण-बलराम मंदिर के तौर पर भी जाना जाता है। इस मंदिर को 1975 में भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद के निर्देश पर बनाया गया था।  

Shri Radha Raman Mandir श्री राधा रमण मंदिर
यह मंदिर गोपाल भट्ट गोस्वामी द्वारा 1542 में बनवाया गया था। इस मंदिर में राधा की मूर्ति मौजूद नहीं है, भगवान कृष्ण के पास रखा एक मुकुट ही राधा को दर्शाता या उनका प्रतीक है।

Gopeshwar Mahadev Temple गोपेश्वर महादेव मंदिर
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और भगवान को एक गोपी के रूप में दर्शाया गया है। भक्त यहां शिवलिंग पर यमुना का पवित्र जल चढ़ाते हैं।

Shahaji Mandir शाहजी मंदिर
शाहजी मंदिर का निर्माण वर्ष 1876 में शाह कुंदन लाल ने करवाया था। यह भगवान कृष्ण को समर्पित है। संगमरमर से बने इस मंदिर के मुख्य देवता को छोटा राधा रमण के नाम से जाना जाता है।

Shri Raghunath Temple श्री रघुनाथ मंदिर
यह मंदिर भगवान विष्णु और उनकी पत्नी देवी लक्ष्मी को समर्पित है। यह वृंदावन के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है और ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है।

Katyayani Shaktipeeth कात्यायनी शक्तिपीठ
कात्यायनी पीठ मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक है और इसे उमा शक्ति पीठ के तौर पर जाना जाता है। यह वृंदावन में भूतेश्वर महादेव मंदिर के भीतर स्थित है।

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इनके अलावा भी वृंदावन में श्री राधा दामोदर मंदिर, मदन मोहन मंदिर, पागल बाबा मंदिर, कुसुम सरोवर, बरसाना, सेवा कुंज, केसी घाट, जयपुर मंदिर, यमुना नदी, श्री वृंदा कुंड आदि देखने लायक स्थान हैं।

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What is the best time to visit Vrindavan घूमने का सबसे अच्छा समय
यहां का मौसम उत्तर भारत के बाकी हिस्सों की तरह ही रहता है। अक्तूबर से मार्च के दौरान वृंदावन आने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। इन महीनों के दौरान मौसम सौम्य और सुखद रहता है।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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