Vastu tips for religious books: सही दिशा में रखें धार्मिक ग्रंथ नहीं तो बढ़ सकती है नकारात्मक ऊर्जा
punjabkesari.in Friday, Feb 20, 2026 - 08:25 AM (IST)
Vastu tips for religious books: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रखी धार्मिक पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत ही नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र भी मानी जाती हैं। इसलिए इन्हें सही दिशा और उचित स्थान पर रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार धार्मिक किताबें किस दिशा में रखनी चाहिए।

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) – सबसे शुभ
वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को सबसे पवित्र और शुभ माना गया है। यह दिशा ज्ञान, आध्यात्म और देव ऊर्जा से जुड़ी होती है। धार्मिक ग्रंथ जैसे श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस, विष्णु पुराण आदि को इस दिशा में रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति बनी रहती है। यदि संभव हो तो पूजा कक्ष भी इसी दिशा में होना शुभ माना जाता है।
पूर्व दिशा – ज्ञान और प्रकाश की दिशा
पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा मानी जाती है और यह ज्ञान व उन्नति का प्रतीक है। यदि ईशान कोण उपलब्ध न हो, तो धार्मिक पुस्तकों को पूर्व दिशा में भी रखा जा सकता है। इस दिशा में किताबें रखने से एकाग्रता बढ़ती है और घर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहता है।

उत्तर दिशा – समृद्धि और सकारात्मकता
उत्तर दिशा कुबेर की दिशा मानी जाती है। यहां धार्मिक ग्रंथ रखने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। ध्यान रखें कि पुस्तकें व्यवस्थित और स्वच्छ स्थान पर रखी हों।
किन बातों का रखें विशेष ध्यान?
धार्मिक किताबों को जमीन पर सीधे न रखें। किताबों के ऊपर अन्य सामान्य वस्तुएं या कपड़े न रखें। इन्हें शयनकक्ष (बेडरूम) में रखने से बचें, विशेषकर बिस्तर के नीचे। किताबें फटी या खराब अवस्था में न रखें। समय-समय पर साफ कपड़े से धूल साफ करें।
क्या दक्षिण या पश्चिम दिशा में रख सकते हैं?
वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है, इसलिए यहां धार्मिक पुस्तकों को रखने से बचना चाहिए। पश्चिम दिशा में रखना बहुत शुभ नहीं माना जाता, लेकिन यदि अन्य विकल्प न हो तो स्वच्छ और ऊंचे स्थान पर रखा जा सकता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार धार्मिक किताबों को घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखना सबसे शुभ माना गया है। सही दिशा में धार्मिक ग्रंथ रखने से घर में शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति बनी रहती है।

