स्वामी विवेकानंद के विचारों को जीवन में अपनाकर डॉक्टर नाग कैसे बने मानवता का प्रतीक
punjabkesari.in Friday, May 29, 2026 - 12:58 PM (IST)
Swami Vivekananda Story : एक डॉक्टर साहब स्वामी विवेकानंद का बहुत सम्मान करते थे। डॉक्टर साहब साधारण तरीके से जीवन यापन करते थे। एक दिन वह पैदल अपने दवाखाने जा रहे थे। बारिश होने वाली थी, एक आदमी को अपने घर की छत ठीक करनी थी। मदद के लिए उसने एक मजदूर को बुलाया था, और दरवाजे पर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था।

उधर से जा रहे डॉक्टर साहब को सामान्य व्यक्ति समझ उनसे बोला कि छत ठीक करनेे में आप मेरी मदद कर दें। मजदूर को बुलाया था वह आया नहीं। मैं आपको मजदूरी दे दूंगा। डॉक्टर उस आदमी के कहे अनुसार छत ठीक कराने में लग गए। उसी सड़क से यहां के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति गुजर रहे थे। डॉक्टर साहब को यह सब करते हुए देख वह बोले, “यह आप क्या कर रहे हैं?”
जवाब मिला, “आज मुझे रोगियों के इलाज के बदले यह काम ज्यादा ठीक लगा। इस सज्जन ने मुझसे सहायता मांगी, सो मैं मदद कर रहा हूं।”
जब यह बात झोंपड़ी वाले उस व्यक्ति ने सुनी तो पानी-पानी हो गया। वह उनके पैर पकड़ कर बोला, “मुझे नहीं मालूम था कि आप इतने बड़े आदमी हैं।”
डॉक्टर साहब ने कहा, “मैं और मेरे एक मित्र विवेकानंद मानते हैं कि धर्म को किताबों से निकालकर आचरण में ढालना होगा। आपने तो मुझे अपने धर्म को आचरण में ढालने का सुअवसर दिया। मुझे आज बहुत बड़ा लाभ हुआ है।” यह थे अपने जमाने के बंगाल के प्रसिद्ध डॉक्टर नाग।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
