आप भी सोमवती अमावस्या पर ऐसे करें पूजा, लंबी होगी पति की उम्र

2020-12-10T13:38:42.38

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का अधिक महत्व है। प्रत्येक वर्ष के कुल 12 अमावस्या तिथियां पड़ती हैं। मगर इन में सोमवती अमावस्या को विशेष कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसारसाल में दो बार सोमवती अमावस्या मनाई जाती है। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि यानि अमावस्या तिथि इस बार 14 दिसंबर यानि सोमवार को पड़ रही है। बताया जाता है इस प्रत्येक अमावस्या की तरह इस दौरान भी स्नान आदि का बहुत महत्व होता है। इसके अलावा इस दिन पितरों की आत्मा की शांति हेतु पावन गंगा घाटों पर पूजा के साथ-साथ पितर तर्पण आदि भी किया जाता है। इस दिन से जुड़ी एक मान्यता के अनुसार पति की लंबी आयु के लिए भी व्रत आदि किया जाता है। तो आइए जानते हैं कि सनातन धर्म के अनुसार इस दिन का क्या महत्व है साथ ही साथ जानेंगे इस दिन इनकी की जाने वाल पूजा की विधि-
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सोमवती अमावस्या का महत्व-
धार्मिक ग्रंथों में इससे जुड़ी कथा की मानें तो महाभारत में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को इस दिन की विशेषता बताते हुए कहा था कि कलियुग में जो भी मनुष्य इस दिन पावन नदी में स्नान करेगा उसे हर तरह की सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी। साथ ही साथ सभी प्रकार के रोग और दुखों से मुक्ति मिलती है।

जिस किसी को अपने पितरों की शांति करवानी हो, उन्हें इस दिन पावन नदियों में स्नान करके पितरों के नाम पर दान करना चाहिए। मान्यता है इस उपाय को करने से पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है।

इसके अलावा इस दिन मौन व्रत रखने का भी विधान है। ऐसा माना जाता है जो मनुष्य इस दिन मौन व्रत रखता है उसे सहस्त्र गोदान के समान फल की प्राप्ति होती है। तो वहीं जो महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं उनके सुहाग की लंबी उम्र प्राप्त होती है।
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क्या करें इस दिन-  
इस दिन यानि सोमवार यानि सोमवती अमावस्या के दिन महिलाओं को शिव जी से पति की दीर्घायु की कामना करनी चाहिए। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल के वृक्ष के मूल भाग में विष्णु जी और अग्रभाग में ब्रह्मा जी और तने में शिव जी का वास माना जाता है, जिस कारण सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है।

खासतौर पर विवाहित महिलाओं को इस दिन पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत और चंदन से पूजा करनी चाहिए तथा कम से कम 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करते हुए पति की दीर्घायु की कामना करनी चाहिए।
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Content Writer

Jyoti

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