Som Pradosh Vrat 2026 : घर में चाहते हैं बरकत और शांति ? सोम प्रदोष पर करें ये 5 विशेष कार्य, साक्षात शिव-पार्वती का मिलेगा आशीर्वाद

punjabkesari.in Sunday, Mar 29, 2026 - 02:26 PM (IST)

Som Pradosh Vrat 2026 : हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे उत्तम दिन माना जाता है। लेकिन जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि सोमवार भगवान शिव का ही दिन है। इसे सोम प्रदोष कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और महादेव की विशेष पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन सूर्यास्त के समय किए गए 5 विशेष कार्य आपकी बंद किस्मत का ताला खोल सकते हैं। तो आइए जानते हैं, वे 5 अचूक उपाय क्या हैं।

Som Pradosh Vrat 2026

शिव लिंग का अभिषेक 
प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद सबसे पहले भगवान शिव के प्रतीक शिवा लिंग का अभिषेक करना चाहिए। शिवजी को जल और दूध बहुत प्रिय हैं।

विधि: तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें थोड़ा सा दूध, गंगाजल, काले तिल और शहद मिला लें। इस मिश्रण से धीरे-धीरे शिवा लिंग पर जल चढ़ाएं और साथ ही 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते रहें।

लाभ: यह कार्य आपके मन को शांत करता है और घर से नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को दूर कर बरकत लाता है।

बेलपत्र अर्पण
शिव पूजा में बेलपत्र का महत्व अतुलनीय है। तीन पत्तों वाला एक बेलपत्र महादेव को अर्पित करना करोड़ों यज्ञों के बराबर फल देता है।

विधि: सोम प्रदोष की शाम को साफ और बिना कटे हुए 11 या 21 बेलपत्र लें। उन पर चंदन से 'राम' या 'ॐ' लिखें और फिर उन्हें शिवा लिंग पर चिकनी तरफ से अर्पित करें।

लाभ: यह कार्य आपकी अधूरी मनोकामनाओं को पूरा करता है और भगवान शिव को प्रसन्न कर आपको 'साक्षात आशीर्वाद' दिलाता है।

Som Pradosh Vrat 2026

दीपदान
प्रदोष व्रत की शाम में दीपदान करने का विशेष महत्व है। दीपदान का अर्थ है- दीया जलाकर समर्पित करना।

विधि: सूर्यास्त के समय घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीया जलाएं। इसके अलावा, अपने घर के मुख्य द्वार पर भी दाहिनी ओर दो मुखी दीया जलाएं। यदि संभव हो, तो शिव मंदिर में जाकर भी दीपदान करें।

लाभ: यह कार्य आपके घर से दरिद्रता और अंधेरे को दूर करता है, लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त करता है और सुख-शांति लाता है।

आरती और शिव चालीसा का पाठ 
शिवजी की पूजा के बाद उनकी आरती करना और शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।

विधि: दीपदान के बाद शांत मन से आसन पर बैठें। सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें, फिर 'शिव चालीसा' का पाठ करें। पाठ के बाद घी के दीये या कपूर से शिव-पार्वती की आरती करें।

लाभ: यह कार्य भगवान शिव के प्रति आपकी भक्ति को दृढ़ करता है और उनकी असीम कृपा आपको दिलाता है।

Som Pradosh Vrat 2026

सत्संग और ध्यान 
प्रदोष का समय भगवान शिव के ध्यान और उनके नाम का कीर्तन करने का सबसे उत्तम समय है।

विधि: पूजा-आरती के बाद कुछ समय मंदिर में ही बैठें। अपनी आंखें बंद करें और भगवान शिव के दिव्य रूप का ध्यान करें। 'ॐ नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का मानसिक जाप करें। आप अपने परिवार के साथ मिलकर शिव भजन भी गा सकते हैं।

लाभ: यह कार्य आपके मन को शुद्ध करता है, मानसिक तनाव को दूर करता है और घर में भक्तिमय, शांतिपूर्ण वातावरण बनाता है।

Som Pradosh Vrat 2026

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Content Editor

Sarita Thapa

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