Smile please: ये है सफलता के मूल मंत्र

punjabkesari.in Thursday, Dec 07, 2023 - 07:37 AM (IST)

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Smile please: अपने जीवन के उद्देश्य को जानना और उसे प्राप्त करने के लिए दृढ़ आत्मविश्वास रखना, यही सफलता की और पहला कदम है। यह अटल विचार, कि मैं अवश्य सफल होऊंगा और उसके अनुसार पुरुषार्थ करना ही सफलता का मूलमंत्र है।

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भाग्य के द्वार पर सिर पटकने से अच्छा, अपने कर्मों में गति पैदा करें। द्वार अपने आप खुलते चले जाएंगे। जब भी कोई बुरा आचरण करने लगे तो उससे कुछ समय के लिए दूरी बढ़ा लें।

जिसके प्रति हम सेवा में समर्पित होते हैं, जिसका आदर करते हैं, उसी की सेवा कर सकते हैं। जिससे नफरत करते हैं, उसके प्रति सेवा कैसे होगी। सेवा प्रेम का सागर रूप है, जिससे प्रेम होता है, उसकी सेवा होती है। उसको सुख पहुंचाने की भावना क्रिया अपने हृदय में बनी रहती है। सेवा उस विराट से प्रेम का एक बहुत बड़ा संबल है। जितना प्रेम बढ़ेगा, उतनी ही सेवा साकार होगी।

आनंद अपने भीतर ही निवास करता है, किन्तु मनुष्य उसे स्त्री में, घर में तथा बाह्य सुखों में खोज रहा है।

सुंदर भवनों और उनके भोग-विलास में लिप्त रहने वाले व्यक्ति प्रभु प्राप्ति के अधिकारी नहीं हैं।

जो काम सुख में लीन हैं, वे योगाभ्यास नहीं कर सकते। भोगी योगी बनने का प्रयत्न करेगा तो रोगी बन जाएगा।

आपका प्रत्येक व्यवहार भक्तिमय होना चाहिए।

घर में रहना पाप नहीं, किन्तु उसके भीतर अति आसक्ति पाप है।

यह भक्ति का समय है- वह भोग का, इस प्रकार का भेदभाव रखने वाला व्यक्ति भक्ति नहीं कर सकता।

भगवान का वंदन केवल शरीर से ही नहीं, मन से भी कीजिए। ऐसा वंदन भगवान को प्रेम बंधन में बांध लेता है।

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प्रत्येक कार्य के प्रारंभ में भगवान का स्मरण करो।

भगवान का आश्रय लेने वाला भय-मुक्त हो जाता है।

निरंतर काल का भय मनुष्यों को पाप कर्म से मुक्त रखता है।

भगवान में मन लगाए बिना काम, क्रोध आदि विकार नष्ट नहीं होते।

अत्यधिक प्रिय वस्तु भगवान को अर्पित करने से भगवान आपके ऊपर प्रसन्न होते हैं।

जीवन में संयम तथा सदाचार न हो तो पुस्तकों का ज्ञान कुछ काम नहीं आता। 

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Content Writer

Niyati Bhandari

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