Shardiya Navratri: आने वाली है मंगलमय घड़ी, शारदीय नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
punjabkesari.in Friday, Aug 29, 2025 - 06:43 AM (IST)

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Shardiya Navratri 2025: इस बार शारदीय नवरात्रि का आरंभ 22 सितंबर 2025 से हो रहा है। 2 अक्टूबर विजयादशमी पर इसका समापन होगा। नवरात्रि में मां दुर्गा अलग-अलग वाहनों पर आती हैं। यह वाहन भविष्य के संकेत और वातावरण की दशा बताते हैं। शारदीय नवरात्रि आश्विन मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से आरंभ होने जा रहे हैं। इस रोज मां भगवती का आगमन हाथी पर होगा।
जब माता रानी हाथी पर सवार होकर आती हैं तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि वर्ष में अच्छी वर्षा, अनाज की प्रचुरता और लोगों के जीवन में समृद्धि होगी। धार्मिक दृष्टि से हाथी शक्ति, स्थिरता और राजसुख का प्रतीक है। व्यक्तिगत स्तर पर भी इसका संकेत है कि भक्तों को मानसिक शांति, परिवारिक सुख और नए अवसर मिलेंगे।
मां दुर्गा का हाथी पर आना देश- दुनिया पर मंगलमय सकारात्मकता प्रभाव डालने वाला है। इसका असर धन-धान्य, कृषि, व्यापार और पारिवारिक जीवन पर सकारात्मक रूप से पड़ता है। यह समय लोगों के लिए शुभ फलदायी होता है। इस बार यदि मां दुर्गा हाथी पर सवार आएंगी तो यह समाज और व्यक्ति दोनों के लिए अत्यंत मंगलकारी और शुभ संकेत है।
नवरात्रि में मां दुर्गा किस वाहन पर सवार होकर आएंगी। यह इस पर निर्भर करता है की नवरात्रि का शुभारंभ किस दिन से हो रहा है। अगर नवरात्रि की शुरुआत रविवार और सोमवार से हो तो माता दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।मंगलवार या शनिवार से हो रही है तो माता की सवारी घोड़ा होता है। वहीं अगर नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार या शुक्रवार से हो रही हो तो मां दुर्गा की सवारी पालकी या डोली होती है।
Shardiya Navratri 2025 Mantra: नवार्ण मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे
Shardiya Navratri 2025 puja vidhi: मां शक्ति का यह मंत्र समर्थ है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजन सामग्री लाएं और प्रेम भाव से पूजन करें। संभव हो तो श्रृंगार का सामान, नारियल और चुनरी अवश्य अर्पित करें। नौ दिन श्रद्धा भाव से ब्रह्म मुहूर्त में और संध्याकाल में सपरिवार आरती करें और अंत में क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।
Perform Maa Durga Aarti with this method इस विधि से करें मां दुर्गा की आरती
आरती के कुछ विशेष नियम होते हैं। विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि देवी-देवताओं के सम्मुख चौदह बार आरती उतारनी चाहिए। चार बार चरणों पर से, दो बार नाभि पर से, एक बार मुख पर से तथा सात बार पूरे शरीर पर से आरती करने का नियम है। आरती की बत्तियां 1, 5, 7 अर्थात विषम संख्या में ही बत्तियां बनाकर आरती की जानी चाहिए।