Rudraksha Mala Niyam: शिव के आंसुओं से जन्मे 'रुद्राक्ष' को धारण करने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल!
punjabkesari.in Friday, Jun 05, 2026 - 10:26 AM (IST)
Spiritual Benefits of Rudraksh: रुद्राक्ष महज एक बीज नहीं है, बल्कि सनातन धर्म में इसे साक्षात भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति महादेव के आंसुओं से हुई है, इसलिए इसे 'शिव की आंख' भी कहा जाता है। शिव भक्त अक्सर महादेव का आशीर्वाद पाने के लिए रुद्राक्ष धारण करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे पहनने की एक विशेष वैदिक विधि है? यदि नियमों का पालन न किया जाए, तो इसका पूर्ण लाभ नहीं मिलता। आइए जानते हैं रुद्राक्ष धारण करने के वे नियम जो हर शिव भक्त को पता होने चाहिए:

रुद्राक्ष खरीदने और चुनाव के नियम
रुद्राक्ष की माला (108 दाने की) अमिट प्रभावकारी होती है। पांचमुखी के कम से कम तीन दाने और अन्य का एक दाना भी बाहु या कंठ में धारण करने से पूर्ण लाभ होता है। ये समस्त रुद्राक्ष व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, भौतिक कष्टों का शमन करके उसमें आस्था, शुचिता और देवत्व के भाव जागृत करते हैं। भूत-बाधा, अकाल मृत्यु, आकस्मिक दुर्घटना, मिर्गी, उन्माद, हृदय रोग, रक्तचाप आदि में रुद्राक्ष धारण का चमत्कारी प्रभाव दृष्टिगोचर होता है। रुद्राक्ष लाल धागे में पिरोकर धारण करना चाहिए।

धारण करने की सही विधि
रुद्राक्ष का दाना अथवा माला जो भी सुलभ हो, गंगाजल या अन्य पवित्र जल स्नान करा, शिवजी की भांति चंदन, अक्षत, धूप-दीप से पूजना चाहिए। पूजनोपरांत ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का 1100 जप करके 108 बार हवन करना चाहिए। तत्पश्चात रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराकर पुन: ॐ नम: शिवाय’ मंत्र जपते हुए पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके धारण कर लेना चाहिए।

रुद्राक्ष को अभिमंत्रित करना
धारण करने के बाद हवन कुंड की भस्म का टीका लगाकर शिव प्रतिमा को प्रणाम करना चाहिए। इस विधि से धारण किया गया रुद्राक्ष त्वरित और निश्चित प्रभावी होता है। यह रुद्राक्ष धारण करने की सरलतम पद्धति है। वैसे समर्थ साधकों को चाहिए कि वे (यदि संभव हो तो) अपने रुद्राक्ष को पंचामृत से स्नान कराकर, अष्टगंध अथवा पंचगंध से भी नहलाएं (उसमें डुबोएं), फिर पूर्ववत पूजा करके उस रुद्राक्ष से संबंधित मंत्र विशेष का (धारियों के आधार पर) 1100 जप करें और 108 बार आहूति देकर हवन करें, तदोपरांत उसी मंत्र को 5 बार जपते हुए रुद्राक्ष धारण करें और भस्म लेपन के पश्चात शिव प्रतिमा को प्रणाम करें।

रुद्राक्ष पहनते समय इन बातों का रखें खास ख्याल
धागे का चुनाव: रुद्राक्ष को हमेशा लाल या पीले रंग के धागे में ही पिरोकर पहनें। भूलकर भी काले धागे का प्रयोग न करें।
धातु का प्रयोग: यदि आप इसे सोने या चांदी में मढ़वाना चाहते हैं, तो ध्यान रखें कि रुद्राक्ष का हिस्सा आपकी त्वचा को स्पर्श करता रहे।
स्वच्छता और शुद्धता: अंतिम संस्कार में जाते समय या शौच आदि के समय रुद्राक्ष को उतारकर किसी पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए। अपवित्र अवस्था में इसे पहनना वर्जित है।
निजी पवित्रता: अपनी पहनी हुई माला कभी किसी दूसरे को न दें और न ही किसी दूसरे की पहनी हुई माला खुद पहनें। साथ ही, रुद्राक्ष को कभी सीधे जमीन पर न रखें।

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