जगन्नाथ मंदिर की रसोई क्यों कहलाती है दुनिया की सबसे अनोखी? जानिए वैज्ञानिक तथ्य

punjabkesari.in Sunday, Jul 19, 2026 - 10:22 AM (IST)

Jagannath Temple kitchen mystery : ओडिशा के पुरी में स्थित प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर अपनी प्राचीन परंपराओं और अनसुलझे रहस्यों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां की रसोई को दुनिया की सबसे बड़ी रसोई माना जाता है, जहां रोजाना भगवान जगन्नाथ के लिए महाप्रसाद तैयार किया जाता है। इस रसोई से जुड़ा 7 बर्तनों (हांडियों) का रहस्य सदियों से लोगों को हैरान करता आया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आस्था के इस चमत्कार के पीछे प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग का एक अद्भुत वैज्ञानिक कारण भी छिपा है।

Jagannath Temple kitchen mystery

7 बर्तनों का मुख्य रहस्य
इस भव्य रसोई में महाप्रसाद पकाने के लिए आज भी पारम्परिक लकड़ी के चूल्हों का उपयोग किया जाता है। भोजन पकाने की प्रक्रिया बेहद अनोखी है। रसोई में चूल्हे पर एक या दो नहीं, बल्कि 7 मिट्टी के बर्तनों (हांडियों) को एक के ऊपर एक सीधी कतार में रखा जाता है। सामान्य भौतिक विज्ञान के नियम के अनुसार, जो बर्तन आग के सबसे करीब (यानी सबसे नीचे) होगा, उसमें गर्मी सबसे पहले पहुंचेगी और खाना सबसे पहले पकेगा लेकिन यहां ठीक उल्टा होता है। सबसे ऊपर रखे सातवें नंबर यानी आखिरी बर्तन का खाना सबसे पहले पकता है। इसके बाद छठे, फिर पांचवें और इसी क्रम में नीचे आते हुए सबसे आखिर में सबसे नीचे वाले बर्तन का खाना पकता है।

Jagannath Temple kitchen mystery

रहस्य के पीछे का विज्ञान- ‘स्टीम ट्रैप’ तकनीक
भले ही यह देखने में किसी चमत्कार जैसा लगता हो, लेकिन इसके पीछे प्राचीन भारतीय कारीगरों और इंजीनियरों की गहरी वैज्ञानिक सोच छिपी है, जिसे ‘स्टीम ट्रैप’ तकनीक कहा जाता है। बर्तनों की विशेष बनावट : इन सातों मिट्टी के बर्तनों का आकार और उनकी बनावट इस तरह की होती है कि नीचे से उठने वाली गर्म भाप सीधे किनारों से होकर सबसे ऊपर वाले बर्तन तक पहुंचती है।

नैचुरल प्रैशर कूकर : सबसे ऊपर वाले बर्तन का ढक्कन पूरी तरह बंद होता है, जिसके कारण वहां भाप फंस जाती है और सबसे ज्यादा दबाव (प्रैशर) बनता है।

पहले पकने की वजह : अत्यधिक दबाव और गर्म भाप के एकत्र होने के कारण सबसे ऊपर वाले बर्तन का खाना सबसे पहले पक जाता है। यह तकनीक किसी आधुनिक प्रैशर कूकर की कार्यप्रणाली जैसी ही है, जो यह साबित करती है कि हमारे पूर्वज विज्ञान और धातु तथा मिट्टी के सही तालमेल से भली-भांति परिचित थे।

Jagannath Temple kitchen mystery

महाप्रसाद से जुड़े अन्य अद्भुत तथ्य

कभी कम नहीं पड़ता भोजन
यहां हर दिन हजारों-लाखों श्रद्धालु आते हैं। प्रसाद हर दिन एक निश्चित मात्रा में ही बनता है, लेकिन मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या चाहे कितनी भी कम या ज्यादा हो, महाप्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न ही कभी व्यर्थ होता है।

मां लक्ष्मी की कृपा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस रसोई में बनने वाले भोजन की देखरेख खुद माता लक्ष्मी करती हैं। भगवान जगन्नाथ को भोग लगते ही इस अन्न से एक अलौकिक खुशबू आने लगती है।

Jagannath Temple kitchen mystery

बर्तनों का दोबारा उपयोग नहीं
शुद्धता का इतना ध्यान रखा जाता है कि महाप्रसाद बनाने के लिए हर बार बिल्कुल नए और ताजे मिट्टी के बर्तनों का ही इस्तेमाल किया जाता है। एक बार इस्तेमाल हो चुके बर्तनों को दोबारा प्रयोग में नहीं लाया जाता है।

जगन्नाथ मंदिर की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी मंदिर रसोइयों में से एक है। रसोई मंदिर परिसर के दक्षिण-पूर्व दिशा में है। यह करीब 150फुट लंबी, 100 फुट चौड़ी और लगभग 20 फुट ऊंची है। इसमें कुल 32 कमरे हैं और इसके अंदर लगभग 250 मिट्टी के चूल्हे बने हुए हैं। यहां हर दिन करीब 600 रसोइए और 400 लोग मिलकर भगवान के लिए प्रसाद की तैयारी करते हैं।

Jagannath Temple kitchen mystery

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Content Editor

Sarita Thapa

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