क्यों रखा जाता है बछ बारस का व्रत, जानें इस पावन दिन से जुड़ी खास मान्यता

punjabkesari.in Sunday, Sep 06, 2026 - 12:00 PM (IST)

Bach Baras Fast Significance : सनातन धर्म में बछ बारस का बहुत खास महत्व है। बछ बारस को गोवत्सा द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। बछ बारस व्रत को मां और संतान के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को बछ बारस का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व पूरी तरह से गौ माता और बछड़े की सेवा को समर्पित होता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए पूरे विधि-विधान और सच्चे मन से व्रत रखती हैं और गौ माता और बछड़े की पूजा करती है। लेकिन कई लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्यों रखा जाता है बछ बारस का व्रत। तो आइए जानते हैं इस व्रत को रखने से जुड़ी कुछ खास मान्यताओं के बारे में- 

क्यों रखा जाता है बछ बारस का व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो महिलाएं इस दिन विधि-विधान से व्रत रखकर बछड़े वाली गाय की पूजा करती हैं, उनके बच्चों पर आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं। गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है। इस दिन गाय और बछड़े की एक साथ पूजा करने से समस्त देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम और कृतज्ञता कैसे व्यक्त की जाए।

पावन कथा और पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसका सीधा संबंध भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं से है। जब कान्हा छोटे थे, तब वे पहली बार बछड़ों को चराने जंगल गए थे। यशोदा मैया ने अपने पुत्र की रक्षा और बछड़ों की सुरक्षा के लिए यह पूजन किया था। एक अन्य लोकप्रिय कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक राजा की बहुओं ने अनजाने में बछड़े को नुकसान पहुंचा दिया था, जिससे पूरे राज्य पर संकट आ गया। बाद में अपनी गलती का पश्चाताप करने और सच्ची भक्ति से बछड़े की पूजा करने पर वह पुनः जीवित हो गया। तभी से संतान की लंबी उम्र के लिए बछ बारस पर गाय-बछड़े की पूजा की परंपरा चली आ रही है।

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Content Editor

Sarita Thapa

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