क्या आप भी दुनिया को खुश करने की गलती कर रहे हैं? एक बार जरूर पढ़ लीजिए नंदी पर सवार शिव-पार्वती की ये कथा

punjabkesari.in Monday, Jan 05, 2026 - 02:09 PM (IST)

Religious Katha : एक बार भगवान शिव एवं मां उमा नंदी पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्हें कुछ लोग मिले। उन लोगों ने कटाक्ष किया, ‘‘देखो कैसा निर्दयी दम्पति है। इस बेचारे निरीह बैल पर दोनों एक साथ सवार हो गए।’’

Religious Katha

यह सुना तो भगवान शंकर नंदी से नीचे उतर गए। उमा नंदी पर सवार रहीं। अभी थोड़ी दूर ही बढ़े थे कि अन्य कुछ लोगों ने असंतोष जताया, ‘‘ये देखो, अपनी स्त्री का कैसा गुलाम है। स्वयं नीचे पैदल चल रहा है और पत्नी को बैल पर सवार किए हुए है।’’

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माता पार्वती को उनकी यह बात अच्छी नहीं लगी। उन्हें संतुष्ट करने के लिए अब वह नीचे उतर गईं और शिवजी को सवारी करने का आग्रह किया। विवश होकर भगवान नंदी पर बैठ गए और देवी उमा नंदी की चाप-से-चाप मिलाकर पैदल चलने लगीं। आगे एक मोड़ पर समाजवादियों का एक दल मिला। उन्होंने यह दृश्य देखा, तो इसे नारी के सम्मान के विरुद्ध बताया। अब भगवान शिव फिर तटस्थ न रह सके।

वह भी उमा के संग पैदल ही चलने लगे। कुछ दूरी पर एक और दल मिला। उन सबने जोरदार अट्टहास किया, ‘‘कैसे मूर्ख हैं? वाहन संग है, फिर भी पैदल चल रहे हैं।’’ 

भगवान मुस्कुराए और उमा से बोले, ‘‘देवी! इस संसार को संतुष्ट करना संभव नहीं। अत: संसार की सुनने से अपनी करना ज्यादा अच्छा है।’’

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Content Editor

Sarita Thapa

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