Ramayan: बहुत कम लोग जानते हैं भगवान राम की एक बहन भी थीं, आखिर क्यों हैं वो लुप्त ?
punjabkesari.in Friday, Apr 04, 2025 - 02:56 PM (IST)

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Sister of lord rama: शास्त्रों के अनुसार, भगवान राम का जन्म आयोध्य के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर चैत्र माह की नवमी को हुआ था इसलिए इस दिन को राम नवमी के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार राम नवमी हर साल चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाए जाने का विधान है। ग्रेगोरियन कैलेंडर की मान्यता के अनुसार ये त्योहार हर साल मार्च या अप्रैल महीने में आता है। श्रीराम के 3 भाई थे, जिनका नाम लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न था। ये बात तो जगजाहिर है, क्या आप जानते हैं राम जी की एक बहन भी थी ?
वाल्मीकि रामायण के बाद दक्षिण भारत में अनेक रामायण लिखी गई। दक्षिण भारतीय लोगों के जीवन में भगवान राम का बहुत बड़ा महत्व है। दक्षिण में श्रीराम ने अपनी सेना का गठन किया तथा रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी। तेलगु में भास्कर रामायण, रंगनाथ रामायण, भोल्ल रामायण, रघुनाथ रामायणम् रचित कि गई। मलयालम में रामचरितम् रामायण रचित की गई। कन्नड़ में कुमुदेन्दु रामायण, तोरवे रामायण, रामचन्द्र चरित पुराण, बत्तलेश्वर रामायण रचित की गई। तथा तमिल में कंबरामायण रामायण रचित की गई।
दक्षिणी रामायणों के अनुसार भगवान राम की एक बहन भी थीं, जो उनसे बड़ी थी। उनका नाम शांता था, जो चारों भाइयों से बड़ी थीं। लोककथा के अनुसार शांता राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री थीं। शांता जब पैदा हुई, तब अयोध्या में 12 वर्षों तक अकाल पड़ा। चिंतित राजा दशरथ को सलाह दी गई कि उनकी पुत्री शांता ही अकाल का कारण है। राजा दशरथ ने अकाल दूर करने हेतु अपनी पुत्री शांता को अपनी साली वर्षिणी जो कि अंगदेश के राजा रोमपद कि पत्नी थीं उन्हें दान कर दिया। शांता का पालन-पोषण राजा रोमपद और उनकी पत्नी वर्षिणी ने किया, जो महारानी कौशल्या की बहन अर्थात श्री राम की मौसी थीं। दशरथ शांता को अयोध्या बुलाने से डरते थे इसलिए कि कहीं फिर से अकाल नहीं पड़ जाए। रोमपद और उनकी पत्नी वर्षिणी ने शांता का विवाह महर्षि विभाण्डक के पुत्र ऋंग ऋषि से कर दिया।
राजा दशरथ और तीनों रानियां अपने उत्तराधिकारी को लेकर चिंतित थे। इनकी चिंता दूर करने हेतु ऋषि वशिष्ठ की सलाह से उन्होंने अपने दामाद ऋंग ऋषि से पुत्रेष्ठि यज्ञ करवाया। इससे पुत्र की प्राप्ति होगी। दशरथ ने आयोजन करने का आदेश दिया। ऋंग ऋषि ने यज्ञ करने से इंकार किया लेकिन बाद में अपनी पत्नी शांता के कहने पर ही ऋंग ऋषि राजा दशरथ के लिए पुत्रेष्ठि यज्ञ करने के लिए तैयार हुए थे।
दशरथ ने केवल अपने दामाद ऋंग ऋषि को ही आमंत्रित किया इस पर ऋंग ऋषि ने बिना अपनी पत्नी शांता के यज्ञ करने से इंकार कर दिया। तब पुत्र कामना में आतुर दशरथ ने दामाद ऋंग ऋषि संग पुत्री शांता को भी न्यौता दिया। शांता के अयोध्या पहुंचते ही वर्षा होने लगी और फूल बरसने लगे। दशरथ, कौशल्या व दोनों रानियों को शांता से मिलकर अत्यधिक प्रसन्नता हुई। दशरथ ने दोनों को सम्मान- सत्कार किया।
शास्त्रानुसार पुत्रेष्ठि यज्ञ कराने वाले का जीवन भर का पुण्य इस यज्ञ की आहुति में नष्ट हो जाता है। ऋंग ऋषि ने पत्नी शांता की गुहार पर पुत्रकामेष्ठि यज्ञ किया जिससे प्राप्त खीर से शांता के चारों भाइयों श्रीराम, भारत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म हुआ। राजा दशरथ ने ऋंग ऋषि को यज्ञ करवाने के बदले बहुत सारा धन दिया जिससे ऋंग ऋषि के पुत्र और कन्या का भरण-पोषण हुआ और ऋंग ऋषि पुनः पुण्य अर्जित करने के लिए वन में जाकर तपस्या करने लगे। शांता ने कभी भी किसी को नहीं पता चलने दिया कि वो राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री हैं। यही कारण है कि मूल रामायणों में उनका उल्लेख नहीं मिलता है।