Radha Kund Snan 2026 : कब है राधा कुंड स्नान? नोट करें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
punjabkesari.in Saturday, Oct 24, 2026 - 01:05 PM (IST)
Radha Kund Snan 2026 : वृंदावन और गोवर्धन की धरती पर ऐसे कई पवित्र स्थल हैं, जिनसे भक्तों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। इन्हीं में से एक है मथुरा के गोवर्धन में स्थित राधा कुंड, जिसे श्री राधा रानी की महिमा से जुड़ा अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है। मान्यता है कि राधा रानी प्रेम, करुणा और वात्सल्य की प्रतीक हैं और सच्चे मन से उनकी आराधना करने वाले भक्त उनसे अपने सुखी जीवन की कामना करते हैं। लेकिन दोस्तों, राधा कुंड का महत्व केवल दर्शन और पूजा तक ही सीमित नहीं है। कार्तिक मास में यहां होने वाले विशेष स्नान के अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। खासतौर पर अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि में होने वाले राधा कुंड स्नान को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि संतान सुख की कामना करने वाले दंपति इस अवसर पर राधा कुंड में स्नान करके राधा रानी से आशीर्वाद मांगते हैं। ऐसे में इस बार साल 2026 में राधा कुंड स्नान कब किया जाएगा। इसका धार्मिक महत्व क्या है और इस अवसर पर स्नान की विधि क्या मानी जाती है। तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

राधा कुंड स्नान 2026 शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 1 नवंबर दिन रविवार को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर होगा और इसका समापन 2 नवंबर दिन सोमवार को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा। राधा कुण्ड अर्ध रात्रि स्नान मुहूर्त की तो इसका समय रात 11 बजकर 37 मिनट से देर रात 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। जिसकी कुल अवधि 52 मिनट रहेगी। राधा कुण्ड स्नान में रात्रि का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि इसका स्नान रात के समय ही किया जाता है। ऐसे में राधा कुण्ड स्नान 1 नवबंर दिन रविवार को किया जाएगा, क्योंकि इस दिन स्नान रात के समय और अष्टमी तिथि पर किया जाता है और 1 नवबंर की रात अष्टमी तिथि मान्य रहेगी।
राधा कुंड स्नान महत्व
इसके महत्व की तो बता दें कि राधा कुंड स्नान के साथ इस दिन अहोई अष्टमी का व्रत भी रखा जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान के लिए व्रत रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भी साधक अहोई अष्टमी की रात राधा कुंड में डुबकी लगाता है, राधा रानी उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी करती है। मान्यता तो यह भी है कि अगर किसी दंपति के संतान नहीं हो रही तो वह इस दौरान रात में एक साथ डुबकी लगाएं तो इससे राधा रानी के आशीर्वाद से उस दंपति को संतान की प्राप्ति हो सकती है। कहा जाता है कि जब किसी वैवाहिक जोड़े की मनोकामना पूरी हो जाती है तो उन्हें राधा कुंड स्नान के अवसर पर अपनी संतान के साथ वापस आकर फिर से स्नान करना होता है।
राधा कुंड स्नान पूजा विधि
अगर कोई दंपति संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर राधा कुंड में स्नान करना चाहता है, तो धार्मिक परंपरा के अनुसार इस अनुष्ठान को विशेष विधि से किया जाता है। इसकी शुरुआत अहोई अष्टमी की रात्रि में होती है। सबसे पहले राधा कुंड के पास दीप प्रज्वलित करके श्री राधा रानी का स्मरण करें और पूरी श्रद्धा के साथ उनकी आराधना करें। इसके बाद हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना उनके सामने रखें और सुखी पारिवारिक जीवन के लिए प्रार्थना करें। परंपरा में आधी रात यानी 12 बजे पति-पत्नी द्वारा एक साथ राधा कुंड में स्नान करने का विधान बताया जाता है। स्नान पूरा होने के बाद कद्दू का दान किया जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक यह अनुष्ठान करने से राधा रानी का आशीर्वाद मिलता है और संतान सुख की कामना पूरी हो सकती है।
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