Diwali 2026: 8 या 9 नवंबर? जानें कब है दीपावली की सही तारीख, लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त और 5 दिवसीय उत्सव का पूरा Calender
punjabkesari.in Wednesday, Oct 21, 2026 - 05:21 PM (IST)
Deepawali 2026: दीवाली को यदि पर्वों और उत्सवों का सम्राट कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति न होगी। जहां इस दिन धनाढ्य अपनी और श्रीवृद्धि के लिए अनुष्ठान करते हैं तो वहीं सामान्यजन भी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उसी श्रद्धाभाव से उन्हें याद करते हैं कि उन पर लक्ष्मी की कृपा हो और उनके घर में भी धन-वैभव बरसे। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी। वहीं, इस अमावस्या तिथि का समापन 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। धार्मिक परंपरा और शास्त्रों के अनुसार दीपावली का पूजन प्रदोष काल में अमावस्या तिथि रहने पर किया जाता है। चूंकि 8 नवंबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए दीपावली का पर्व 8 नवंबर 2026 (रविवार) को ही धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन शाम को घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में दीप प्रज्वलित किए जाएंगे।

लक्ष्मी-गणेश पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त
दिवाली की शाम को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के पूजन के लिए विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा:
शुभ पूजा मुहूर्त: शाम 5 बजकर 54 मिनट से शाम 7 बजकर 50 मिनट तक है। इस शुभ समय के दौरान घर के सभी सदस्य एक साथ एकत्र होकर विधि-विधान से भगवान गणेश और धन-धान्य की देवी मां लक्ष्मी का ध्यान व पूजन कर सकते हैं।

दीपावली 2026 का 5 दिवसीय पर्व कैलेंडर
दिवाली से जुड़े प्रमुख त्योहारों की तिथियां इस प्रकार हैं:
धनतेरस- 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार)
छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी- 7 नवंबर 2026 (शनिवार)
दीपावली (लक्ष्मी पूजन)- 8 नवंबर 2026 (रविवार)
गोवर्धन पूजा-10 नवंबर 2026 (मंगलवार)
भाई दूज-11 नवंबर 2026 (बुधवार)
दीपावली की सरल और प्रामाणिक पूजा विधि
दीपावली पूजा सामग्री
रौली, मौली, सुपारी- 5, धूपपान पत्ते- 5, लौंग- 5, इलायची- 5, कमल गट्टे- 20, कमल का फूल, फूल माला, खुले फूल, 5 फल, 5 मिठाई, पानी वाला नारियल, दूध आधा किलो, दही-250 ग्राम, केसर, लक्ष्मी गणेश जी की फोटो या मूर्त, आम के पत्ते, कपूर, जनेऊ, चंदन, दूब,मिट्टी के दीये-12 छोटे एक बड़ा, सरसों का तेल, देसी घी, रुई, ज्योति, पांच मेवा, पांच मिठाई, चांदी का सिक्का, अष्ट गंध, माता का शृंगार, चावल सवा किलो, शक्कर 50 ग्राम, खील-बताशे, मिठाई, मोमबत्ती, गंगाजल, माचिस, शंख, रेशमी वस्त्र, पीली सरसों, सिंदूर, पंचामृत, हवन सामग्री, जौ, तिल, तुलसी की माला, हवन कुंड, आसन, दक्षिणा आदि।

दीपावली पूजा विधि
स्नान करें, पूजा के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख रखें और कोई दरी या कंबल बिछा लें। द्वार पर रंगोली बना लें। थाली में अष्टदल बना कर नव ग्रहों की आकृति आटे से बना कर, गणेश जी, लक्ष्मी जी व सरस्वती जी की मूर्तियां रखें। आवाहन करें। अक्षत, पुष्प, अष्टगंध युक्त जल अर्पित करें। दिशा रक्षण के लिए बाएं हाथ से पीली सरसों लेकर दाएं हाथ में ढंक कर चारों दिशाओं में फैंकें।
चौकी पर लाल वस्त्र बिछा कर थाली रखें। कलश, धूप दीप रखें। कलश में जल भर कर उसमें गंगा जल, थोड़े से चावल, एक चांदी या प्रचलित सिक्का डाल दें। कलश पर आम के 5 या 7 पत्ते रखें। पानी वाले नारियल पर 3 या 5 चक्र कलावा या मौली बांधकर कलश पर रख दें। गणेश जी व लक्ष्मी जी तथा श्रीयंत्र रखें। केसर, चंदन से स्वास्तिक बना कर गणेश जी, लक्ष्मी जी व श्रीयंत्र को स्थापित करें। लक्ष्मी जी को गणेश जी के दाएं रखें। गणेश जी पर अक्षत-पुष्प चढ़ाएं। पंचामृत-दूध ,दही, घी, शहद व शक्कर से स्नान कराएं फिर जल डालें। फिर मौली, जल, चंदन, कुमकुम, चावल, पुष्प, दूर्वा, सिंदूर ,रौली इत्र,धूप दीप,मेवे प्रसाद फल पान, सुपारी, लौंग, इलायची व द्रव्य-11 रुपए बारी-बारी चढ़ाएं। दूध, दही, घी, मधु, शक्कर पंचामृत, चंदन, गंगा जल से प्रतिमा को स्नान करवाएं। वस्त्र, उपवस्त्र, आभूषण,चंदन, सिंदूर, कुमकुम, इत्र, फूल आदि समर्पित करें। लक्ष्मी जी की प्रतिमा के हर अंग को पुष्प से पूजें।

इस मंत्र का जाप करते जाएं-
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

तेल का एक चौमुखी दीपक और 21 छोटे दीपक जलाएं। आचमन करें। प्रथम मूर्तियों पर तिलक लगा कर फिर अपने व अन्य सदस्यों के कलावा बांधें, तिलक लगाएं। गुरु तथा लक्ष्मी जी का ध्यान करें। मूर्तियों पर चावल, पान, सुपारी, लौंग, फल, कलावा, फल, मिठाई, मेवे आदि चढ़ाएं। अक्षत-पुष्प दाहिने हाथ में लेकर पृथ्वी तथा नव ग्रह- सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु, कुबेर देवता, स्थान देवता, नगर खेड़ा वास्तु देवता, कुल देवी या देवता का आह्वान करें। हाथ जोड़ कर गणपति व अन्य देवी-देवताओं को नमस्कार करें और संकल्प लें।

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