Radha ashtami barsana: राधा अष्टमी पर नहीं जा सकते बरसाना, घर बैठे लें चरण दर्शन की पूरी परंपरा और दिव्य वातावरण का आनंद
punjabkesari.in Friday, Aug 29, 2025 - 12:42 PM (IST)

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Radha ashtami barsana 2025: राधा अष्टमी के दिन बरसाना श्रीजी मंदिर का वातावरण ऐसा होता है, मानो स्वयं राधा-कृष्ण ब्रजभूमि में प्रकट होकर भक्तों को अपना साक्षात दर्शन दे रहे हों। यह केवल त्योहार नहीं बल्कि प्रेम, भक्ति और आत्मा के दिव्य मिलन का पर्व है। बरसाना श्रीजी मंदिर (श्री राधा रानी मंदिर, मढ़न मोहन पर्वत और लाडली जी मंदिर) में राधा अष्टमी का उत्सव अपने आप में अद्भुत और दिव्य है। यह अनुभव केवल दर्शन नहीं बल्कि प्रेम और भक्ति की चरम सीमा है।
भक्त घंटों लाइन में खड़े रहते हैं ताकि केवल कुछ क्षणों के लिए राधा रानी के चरणों का दर्शन कर सकें। जब चरण दर्शन होते हैं तो भक्तों की आंखें स्वतः नम हो जाती हैं और हृदय में शांति, प्रेम और करुणा का भाव भर जाता है। कहते हैं कि इस दिन जो भी राधा जी के चरणों का दर्शन करता है, उसे वैकुंठ से भी बढ़कर आनंद प्राप्त होता है। आइए क्रमवार जानें राधा अष्टमी की परंपरा और वातावरण।
Beginning of the day of Radha Ashtami राधा अष्टमी के दिन की शुरुआत
तड़के ही मंगला आरती होती है, मंदिर घी के दीपों और घंटियों की ध्वनि से गूंज उठता है। पूरा बरसाना नगर “राधे-राधे” के जयघोष से जीवंत हो जाता है। भक्त, साधु-संत और वैष्णव अलग-अलग जगह से आकर ब्रज की गलियों में संकीर्तन करते हैं।
Radha ji ka shingar राधा जी का श्रृंगार
इस दिन राधा रानी का विशेष सोलह श्रृंगार किया जाता है। राधा रानी को लाल-पील रंग के दिव्य वस्त्र, चूड़ी, हार, पायल, सिंदूर, फूल-मालाओं से सजाया जाता है। श्रृंगार के बाद राधा जी का झूला उत्सव भी मनाया जाता है।
Tradition of seeing the feet of Radha ji राधा जी के चरण दर्शन की परंपरा
सामान्य दिनों में राधा रानी की मूर्ति के चरण ढके रहते हैं लेकिन राधा अष्टमी के दिन, विशेष अनुष्ठान के बाद राधा जी के दिव्य चरणों का अनावरण किया जाता है। यह क्षण भक्तों के लिए अत्यंत दुर्लभ और भावविभोर करने वाला होता है। भक्त मानते हैं कि राधा रानी के चरणों की धूल ही जीवन को पवित्र बना देती है।
Environment of Barsana बरसाना का वातावरण
राधा रानी के मंदिरों में “राधे-राधे” और “बरसाने वाली रानी की जय” के जयकारे गूंजते रहते हैं। हरिनाम संकीर्तन, मृदंग-करताल की ध्वनि वातावरण को ब्रज की लीलाओं से भर देती है। मंदिर और परिसर को गेंदा, गुलाब, कमल व अन्य फूलों से सजाया जाता है। खीर, माखन-मिश्री, अरबी, मालपुआ, पान आदि का भव्य भोग लगता है और फिर भक्तों को वितरित किया जाता है।
Special rituals and fairs in Barsana बरसाना में विशेष अनुष्ठान और मेला
बरसाना में इस अवसर पर भव्य मेला लगता है। गांव-गांव से भक्त कीर्तन करते हुए आते हैं। संध्या समय महाआरती होती है, जिसमें हजारों दीप प्रज्ज्वलित किए जाते हैं। पूरा वातावरण भक्ति, आनंद और प्रेम रस से भर जाता है।