Premanand Maharaj Teachings : पूज्य प्रेमानंद जी महाराज से जानें किस्मत चमकने से पहले मिलते हैं कौन से ईश्वरीय इशारे
punjabkesari.in Sunday, Mar 22, 2026 - 11:19 AM (IST)
Premanand Maharaj Teachings : ब्रज की पावन धरा पर राधा नाम की अलख जगाने वाले संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज अक्सर अपने सत्संगों में कहते हैं कि ईश्वर कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे भावों में बसता है। जब हमारे जीवन का अंधकार छंटने वाला होता है और भाग्य का सूर्य उदय होने को होता है, तो परमात्मा हमें कुछ सूक्ष्म संकेत देना शुरू कर देते हैं। ये संकेत भौतिक लाभ से अधिक हमारे आंतरिक रूपांतरण से जुड़े होते हैं। तो आइए जानते हैं महाराज जी के वचनों के अनुसार वे कौन से इशारे हैं, जो बताते हैं कि अब आपके अच्छे दिन आने वाले हैं।

नाम-जप में अचानक बढ़ती हुई रुचि
महाराज जी कहते हैं कि सबसे बड़ा शुभ संकेत यह है कि बिना किसी विशेष प्रयास के आपकी जिह्वा पर भगवान का नाम राधा-राधा, राम-राम या कृष्ण-कृष्ण आने लगे। यदि आपको संसार की बातों से ज्यादा 'नाम-जप' में आनंद आने लगा है, तो समझ लीजिए कि आपके पूर्व जन्मों के पाप कट रहे हैं और साक्षात लाड़ली जी ने आपका हाथ थाम लिया है।
ब्रह्म मुहूर्त में स्वतः नींद का खुलना
यदि आपकी नींद रोज सुबह 3:00 से 5:00 बजे के बीच (ब्रह्म मुहूर्त) बिना किसी अलार्म के खुलने लगी है, तो यह एक अत्यंत पवित्र संकेत है। महाराज जी के अनुसार, इस समय दैवीय शक्तियां ब्रह्मांड में विचरण करती हैं। इस समय जागना और प्रभु का स्मरण करना इस बात का प्रतीक है कि प्रकृति आपको सफल और सुखी बनाना चाहती है।
साधु-संतों और सत्संग के प्रति आकर्षण
जब बुरा समय होता है, तो मनुष्य को संतों की वाणी कड़वी लगती है। लेकिन जब भाग्य चमकने वाला होता है, तो आपका मन सत्संग सुनने को लालायित होने लगता है। यदि आपको महापुरुषों के दर्शन करने या उनके प्रवचन सुनने में शांति मिलने लगी है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि आप ईश्वरीय मार्ग पर हैं और आपकी उन्नति निश्चित है।
स्वभाव में क्षमा और 'धैर्य' का आना
प्रेमानंद जी महाराज अक्सर जोर देते हैं कि असली भाग्योदय वह नहीं जब जेब में पैसा आए, बल्कि वह है जब मन से 'क्रोध' चला जाए। यदि आप अपमान सहकर भी शांत रह पा रहे हैं और दूसरों की गलतियों को माफ करने का सामर्थ्य आ गया है, तो समझ लें कि आप पर ईश्वरीय कृपा बरस रही है। यह आंतरिक शांति ही आने वाली बड़ी समृद्धि की नींव है।
जीव-मात्र के प्रति करुणा का भाव
यदि आपको अचानक भूखे जानवरों, पक्षियों या किसी असहाय व्यक्ति की सेवा करने में सुख मिलने लगा है, तो यह मां लक्ष्मी के आगमन का संकेत है। महाराज जी कहते हैं, "जो दूसरों के आंसू पोंछता है, ईश्वर उसके जीवन के सारे दुख सोख लेता है। परोपकार का बढ़ता हुआ भाव बताता है कि अब आप पर दरिद्रता का साया नहीं रहेगा।
विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग विश्वास
कई बार अच्छे दिन आने से ठीक पहले कठिन परीक्षाएं आती हैं। यदि उन मुश्किलों में भी आपका विश्वास डगमगाया नहीं और आप यही कह रहे हैं कि जो ठाकुर जी की मर्जी, वही सही," तो समझ लें कि आप परीक्षा में पास हो गए हैं। अब ईश्वर आपको वह सब देने वाले हैं, जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की थी।
सात्विक आहार और आचरण
यदि आपका मन तामसिक भोजन और कुसंगति से हटने लगा है, तो यह शरीर और मन के शुद्धिकरण का इशारा है। शुद्ध शरीर ही शुद्ध और बड़ी ऊर्जा को धारण कर सकता है।
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