Pradosh Vrat 2020: आज इस विधि से भगवान शिव हर इच्छा करेंगे पूरी

2020-10-28T05:30:38.83

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Pradosh Vrat 2020: आज 28 अक्तूबर, बुधवार को शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस रोज़ भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए प्रदोष व्रत रखने का शास्त्रीय विधान है। ये व्रत बुधवार के दिन आ रहा है इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस व्रत के प्रभाव से जीवन और कुंडली में चल रहे हर दोष का अंत होता है। पुराणों के अनुसार प्रदोष के दिन परमात्मा रूपी शिवलिंग की प्रत्येक व्यक्ति को पूजन आराधना करनी ही चाहिए। शिवलिंग मिट्टी का, पत्थर का, स्वर्ण का, रजत का तथा पारे आदि का बनवाकर प्राय: पूजन किया जाता है।

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पारे का शिवलिंग बनाकर पूजन करने से महाऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

स्वर्ण की धातु से बनाए शिवलिंग की यदि पूजा अर्चना की जाए तो महामुक्ति प्राप्त होती है।

अष्टधातु से शिवलिंग का निर्माण करके यदि पूजा जाए तो सर्वसिद्धियों की प्राप्ति होती है।

सीसा से बनाए गए शिवलिंग की पूजा करने पर तत्क्षण ही शत्रु का नाश हो जाता है।

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रजत से बनाए गए शिवलिंग की पूजा अर्चना करने से महाविभूति की प्राप्ति होती है।

नमक से यदि शिवलिंग बनाकर पूजा अर्चना किया जाए तो सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

मिट्टी से बनाए गए शिवलिंग की पूजा करने पर समस्त कार्य सिद्धि होती है।

भस्म से निर्मित किए गए शिवलिंग की पूजा की जाए तो सभी फल प्राप्त होते हैं।

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कस्तूरी से बनाए गए शिवलिंग की पूजा करने पर पूजा करने वाला शिव सा पूज्य पाता है।

गाय के गोबर (पृथ्वी पर गिरने से पहले ही ग्रहण किया जाए) से  शिवलिंग बनाकर पूजा करने पर ऐश्वर्य लाभ होता है।

धान्य (गेहूं, चावल, जौ, चना आदि) से बनाए गए शिवलिंग की पूजा की जाए तो स्त्री धन तथा पुत्र की प्राप्ति होती है।

पुष्पों का शिवलिंग बनाकर पूजन अर्चन करने से भूमि का लाभ प्राप्त होता है।

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मिश्री का शिवलिंग निर्मित करके पूजन अर्चन किया जाए तो रोगों का नाश होकर आरोग्य की प्राप्ति होती है।

बांस के वृक्ष पर निकले हुए अंकुरों से यदि शिवलिंग बनाकर पूजन किया जाए तो वंश वृद्धि होती है।

फलों से निर्मित शिवलिंग की पूजा करने पर शुभाशुभ की प्राप्ति होती है।

आंवले के फल से शिवलिंग बनाकर पूजन से मोक्ष की प्राप्ति होती है और बंधन से मुक्ति मिलती है।

कपूर से बनाए गए शिवलिंग का पूजन करने पर मुक्ति की प्राप्ति होती है।

मक्खन से शिवलिंग बनाकर पूजन अर्चन करने पर यश, र्कीत तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

गुड़ का शिवलिंग बनाकर पूजन अर्चन करने पर महावशीकरण की प्राप्ति होती है।

लहसुनियां पत्थर का शिवलिंग बनाकर पूजन करने पर शत्रुओं को पग-पग पर विघ्न तथा मान हानि प्राप्त होती है।

अष्टलोह के शिवलिंग को बनाकर पूजन करने पर कोढ़ नामक रोग का नाश हो जाता है।

मोती का बनाया हुआ शिवलिंग पूजन करने पर सौभाग्य में चार चांद लगाता है।

इस पूजन में सावधानी यही रखनी होगी कि ठोस पदार्थ अर्थात शिला, रत्न तथा धातु के द्वारा निर्मित किए गए शिवलिंग की पूजा अर्चना तो सदैव एक ही शिवलिंग पर की जा सकती है, परंतु दूसरी विभिन्न सामग्री से बनाए गए शिवलिंग को प्रत्येक पूजन की समाप्ति पर संहार मुद्रा के द्वारा विसर्जन कर देना होगा अन्यथा अप्रत्यक्ष हानि की भी संभावना है।

माना जाता है कि मिट्टी आदि के बनाए शिवलिंग से जितनी बार भी मिट्टी टूटकर गिरेगी, साधक को या पूजक को उतने ही करोड़ वर्षों तक नरक की अग्रि से झुलसना होगा, अत: अन्य सामग्री के द्वारा निर्मित शिवलिंग का विसर्जन, पूजन कार्य की समाप्ति पर कर देना चाहिए।

 

 


Niyati Bhandari

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