Paush Purnima 2022: इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, मिलेगा 100 यज्ञों के बराबर पुण्य

punjabkesari.in Monday, Jan 17, 2022 - 08:50 AM (IST)

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Paush Purnima 2022: हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में पूर्णिमा का बहुत महत्व है। वैसे तो हर महीने में पूर्णिमा आती है और पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां होती हैं, जिनका अलग-अलग महत्व होता है। इन सभी पूर्णिमा तिथियों में पौष मास की पूर्णिमा धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है।

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Paush Purnima ka mahatva: नए साल की पहली पूर्णिमा आज यानी 17 जनवरी, सोमवार को है। इस दिन पूजा, जप, तप और दान करने का विशेष विधान है। धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति को सौ यज्ञों के समतुल्य पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही पूर्णिमा के दिन दान करने से अमोघ फलों का वरदान मिलता है। पौष मास की पूर्णिमा के दिन शाकंभरी जयंती मनाई जाती है। जैन धर्म के मानने वाले पुष्यभिषेक यात्रा प्रारंभ करते हैं। बनारस में दशाश्वमेध तथा प्रयाग में त्रिवेणी संगम पर स्नान को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

Paush Purnima: ऐसी मान्यता है कि की पौष पूर्णिमा के दिन प्रभु श्री विष्णु तथा माता लक्ष्मी की सच्चे दिल से पूजा करने मात्र से ही मोक्ष के लिए मार्ग खुल जाता है। इतना ही नहीं, इस दिन चंद्रमा की भी अराधना की जाती है। पूर्णिमा की रात चंद्रमा भी अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है। इस दिन उपवास रखने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति में सुधार होता है तथा मानसिक तनाव एवं उथल-पुथल की स्थिति से छुटकारा प्राप्त होता है।

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Paush purnima shubh muhurat पौष पूर्णिमा शुभ मुहूर्त
पौष पूर्णिमा तिथि 17 जनवरी सोमवार को रात्रि 3:18 मिनट से आरम्भ होगी और 18 जनवरी, 2022, मंगलवार प्रातः 5:17 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि मान्य होने के कारण पौष पूर्णिमा 17 जनवरी को मनाई जाएगी।

Paush purnima puja vidhi पूर्णिमा व्रत पूजा विधि
17 जनवरी 2022 को ब्रह्ममुहूर्त में पौष पूर्णिमा का स्नान करें। स्नान के बाद किसी गरीब या ब्राह्मण को अन्न, गरम कपड़े, शक्कर, घी आदि का दान करें। यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है तो दही, शंख, सफेद वस्त्र आदि का दान करें।

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Paush purnima vrat vidhi पूर्णिमा व्रत विधि
दिन भर उपवास रखें। संध्याकाल में सत्य नारायण की कथा श्रवण करें। पूजा के दौरान सर्वप्रथम गणेश जी, इंद्र देव और नवग्रह सहित कुल देवी-देवता का पूजन करें। इसके उपरांत सत्यनारायण भगवान का पूजन करें। भोग स्वरूप भगवान को चरणामृत, पान, तिल, मौली, रोली, कुमकुम, फल, फूल, पंचगव्य, सुपारी, दूर्वा आदि अर्पित करें। इसके बाद आरती और हवन कर पूजा सम्पन्न करें। इससे सत्य नारायण देव प्रसन्न होते हैं।   

गुरमीत बेदी
gurmitbedi@gmail.com 
   

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Content Writer

Niyati Bhandari

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