Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में घर के इन स्थानों पर जलाएं दीपक, मिलेगा माता रानी का आशीर्वाद
punjabkesari.in Friday, Mar 20, 2026 - 11:50 AM (IST)
Navratri diya rules: चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व होता है। साल 2026 में नवरात्रि के दौरान भक्त पूरे श्रद्धा भाव से मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। इन नौ दिनों में भक्त कलश स्थापना और अखंड ज्योत जलाकर मां की कृपा प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केवल मंदिर में ही नहीं बल्कि घर के कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाने से भी माता रानी का आशीर्वाद कई गुना बढ़ जाता है।

नवरात्रि में दीपक जलाने का महत्व
नवरात्रि में दीपक जलाना सकारात्मक ऊर्जा, शुद्धता और देवी शक्ति के आगमन का प्रतीक माना जाता है। अखंड ज्योत मां की निरंतर उपस्थिति का संकेत देती है, वहीं घर के विभिन्न स्थानों पर दीपक जलाने से सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

नवरात्रि में इन जगहों पर जरूर जलाएं दीपक
प्रवेश द्वार पर
घर का मुख्य द्वार शुभता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में सूर्यास्त के बाद मुख्य द्वार के दाईं ओर घी या तेल का दीपक जलाना चाहिए। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में देवी कृपा बनी रहती है।
तुलसी के पास
तुलसी माता को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। प्रतिदिन शाम को तुलसी के पास घी का दीपक जलाने से घर के वास्तु दोष दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है।
रसोई घर में
रसोई को माता अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है। नवरात्रि के दौरान रात में रसोई में दीपक जलाने से घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती।
अलमारी या तिजोरी में
जहां घर का धन रखा जाता है, वहां दीपक जलाना विशेष फलदायी माना गया है। ऐसा करने से मां लक्ष्मी और देवी दुर्गा दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
आंगन में
घर के आंगन या मध्य स्थान पर दीपक जलाना वास्तु के अनुसार अत्यंत शुभ होता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पारिवारिक शांति बनी रहती है।

ध्यान रखने योग्य बातें
दीपक हमेशा साफ स्थान पर जलाएं।
गाय के घी का दीपक अधिक शुभ माना जाता है।
दीपक जलाते समय श्रद्धा और शुद्धता का ध्यान रखें।
अखंड ज्योत को कभी बुझने न दें। पुराणों में कहा गया है जिस वक्त तक अखंड ज्योति का संकल्प लें, उससे पूर्व वह खंडित नहीं होनी चाहिए। इसे अमंगल माना जाता हैं। अखंड ज्योति को चिमनी से ढक कर रखें। अखंड ज्योति के जलने का संकल्प समय पूरा हो जाए तो उसे जलने दें। स्वयं शांत होने दें, फूंक मारकर अथवा हाथ से न बुझाएं। ईशान कोण अर्थात उत्तर पूर्व को देवताओं की दिशा माना जाता है। इस दिशा में माता की प्रतिमा और अखंड ज्योति प्रज्वलित करना शुभ होता है। जो माता के सामने अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं, उन्हें इसे आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में रखना चाहिए। पूजन के समय मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में रखें।
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