नवदुर्गा के 9 नामों का जाप माना जाता है कल्याणकारी, जानें मां के हर स्वरूप की खास पहचान
punjabkesari.in Sunday, Oct 11, 2026 - 01:31 PM (IST)
Navdurga 9 Names Chanting Benefits : हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इन नौ रूपों को नवदुर्गा कहा जाता है। मां के प्रत्येक स्वरूप की अपनी अलग महिमा, पहचान और पौराणिक कथा है। कहीं मां शैलपुत्री शक्ति और आस्था का प्रतीक हैं, तो कहीं मां ब्रह्मचारिणी तपस्या और साधना का संदेश देती हैं। वहीं, मां चंद्रघंटा शांति और कल्याण से जुड़ी हैं, जबकि मां कालरात्रि को बुराइयों का नाश करने वाली देवी माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के इन अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में भी नवदुर्गा के नामों और उनकी महिमा का वर्णन मिलता है। आइए जानते हैं मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक, नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेषताएं, उनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं और उनकी पूजा का महत्व।
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥
पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥
अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे। विषमे दुर्गमे चैव भयार्ता: शरणं गता:॥
शैलपुत्री- नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा होती है। पर्वतराज हिमालय के यहां पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा था।
ब्रह्मचारिणी- मां दुर्गा की नवशक्तियों का यह दूसरा स्वरूप है। यहां ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या है। ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी अर्थात तप का आचरण करने वाली। ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है।
चंद्रघंटा- मां दुर्गा की इस तृतीय शक्ति का पूजन नवरात्र के तीसरे दिन किया जाता है। मां का यह स्वरूप शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
कूष्माण्डा- अपनी मन्द हंसी से अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से जाना जाता है।
स्कन्दमाता- भगवान स्कन्द की माता होने के कारण मां दुर्गा के इस स्वरूप को स्कन्दमाता कहा जाता है।
कात्यायनी- विश्वप्रसिद्ध ऋषि कात्यायन ने भगवती पराअम्बा की उपासना करते हुए कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि भगवती उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म लें। माता ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। महर्षि कात्यायन ने इनकी पूजा की, इसी कारण से यह देवी कात्यायनी कहलाईं।
कालरात्रि- मां दुर्गा की इस सातवीं शक्ति के शरीर का रंग घने अंधकार की भांति काला है, बाल बिखरे हुए, गले में विद्युत की भांति चमकने वाली माला है। मां का यह स्वरूप देखने में अत्यन्त भयानक है किन्तु सदैव शुभ फलदायक है। अत: भक्तों को इनसे भयभीत नहीं होना चाहिए।
महागौरी- मां आदि शक्ति दुर्गा की यह आठवीं शक्ति हैं। पार्वती रूप में इन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इनकी तपस्या से जब भगवान शिव प्रसन्न हुए, तब इनका शरीर विद्युत के समान अत्यन्त कांतिमान गौर हो गया, तभी से इनका नाम गौरी पड़ा।
सिद्धिदात्री- मां भगवती दुर्गा की यह नवम शक्ति है। सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली माता इन्हीं को माना गया है।

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