Muni Shri Tarun Sagar: आपका नजरिया क्या है ?
punjabkesari.in Friday, Nov 28, 2025 - 10:03 AM (IST)
संतोष रूपी पेंदा
तृष्णा बेपेंदे की बाल्टी है। इसे कुएं में डालो, भरो, खड़खड़ाओ और खींचो तो खाली की खाली। ऐसा नहीं है कि कुएं में पानी नहीं है। पानी है। वह तुम्हारी बाल्टी भर भी सकता है पर चूंकि बाल्टी बेपेंदा है, इसलिए वह नहीं भरेगी। लोग जिंदगी भर कुओं को बदलते रहते हैं। कभी इस कुएं पर जाते हैं तो कभी उस कुएं पर और जब बाल्टी नहीं भरती है तो कुओं को दोष देते हैं। तृष्णा रूपी बेपेंदा बाल्टी में संतोष रूपी पेंदा लगा दो, तुम्हारी बाल्टी भर जाएगी।

मृत्यु का तीसरा घंटा
परमात्मा परीक्षक है। यह दुनिया, जिसमें तुम रहते हो, एक परीक्षा भवन है। तुम्हारा जीवन उत्तर पुस्तिका है। समय केवल तीन घंटे है। प्रश्र पत्र बंट चुके हैं। बालपन खत्म होते ही पहला घंटा बज चुका है। दूसरा घंटा जवानी खत्म होते ही बज चुका है। मृत्यु का तीसरा घंटा शीघ्र बजने वाला है। क्या तुम्हें फेल होने का डर नहीं है?

फूल जैसे बनो
तुम भगवान के चरणों में फूल चढ़ाने जाओ तो इस चक्कर में मत पड़ना कि कौन-सा फूल चढ़ाऊं? गुलाब का फूल चढ़ाऊं या चमेली का चढ़ाऊं? बस कोई भी फूल लेना और चढ़ा देना। दरअसल फूल चढ़ाते समय केवल इतना ही विचार करना कि आदमी का जीवन फूल जैसा होना चहिए। जीवन कमल जैसा फूल होगा तो भगवान के चरणों और गले में भी जगह मिल सकती है। इतना ही नहीं, भगवान अपने सिर पर भी स्थान दे सकते हैं। बशर्ते कि हम फूल जैसे कोमल, सुंदर और सुगंधित बनें।

नजरिए का फर्क
दो मित्र बातें कर रहे थे। एक बोला- कैसा कलयुग है। चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा है। दो काली रातों के बीच केवल एक उजला दिन आता है। तभी दूसरे ने कहा : नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं है। दो उजले दिनों के बीच केवल एक ही तो अंधेरी रात आती है। परिस्थिति एक ही है, मगर दोनों के नजरिए में कितना फर्क है। आपका नजरिया क्या है?
