Muni Shri Tarun Sagar: मंथरा आज भी जिन्दा है...

punjabkesari.in Saturday, Feb 28, 2026 - 11:17 AM (IST)

मां-बाप की तस्वीर
मां उस समय सर्वाधिक अपमान महसूस करती है जिस समय उसका बेटा पत्नी के सामने उसे डांटता है, आंखें दिखाता है। दुनिया के सभी रिश्तों में मां का रिश्ता सबसे बड़ा है क्योंकि उसकी आयु सभी रिश्तों से नौ माह अधिक हुआ करती है। मां कैसी भी हो अगर आप उसे सुख नहीं दे सकते तो कम-से-कम दुख भी न दें। अपनी जेब में मां-बाप की तस्वीरें रखें क्योंकि इसी तस्वीर ने तुम्हारी तकदीर बनाई है।

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बड़ा कौन?
बड़ा आदमी कौन है? क्या वह, जिसकी चार फैक्ट्री चल रही हैं? क्या वह, जिसके घर नौकर-चाकर हैं जो हजारों-लाखों में खेलता है? क्या वह, जिसके पास सत्ता है? कुर्सी पर है? नहीं। बड़ा आदमी वह नहीं अपितु बड़ा आदमी वह है जो गरीबी में घबराता नहीं और अमीरी में इतराता नहीं है। आदमी पैसे से नहीं, अपितु दिल से बड़ा होता है।

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मंथरा आज भी जिंदा है
रामायण में एक पात्र का नाम है-मंथरा। मंथरा वो- जो दिलों में दूरियां पैदा करे। कैकेयी - जो राम पर प्रेम न्यौछावर करती थीं पर मंथरा ने उनके मन में नफरत का ऐसा जहर घोला कि देखते-ही-देखते पासा पलट गया और उन्हें चौदह वर्ष का वनवास दिला दिया। रामायण में मंथरा की मृत्यु का कहीं उल्लेख नहीं है। इसका मतलब साफ है कि मंथरा आज भी जिन्दा है, जो लोगों के दिलों में दूरियां बढ़ा रही है।

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भगवान की नहीं मानते
देश की खुशकिस्मती यह है कि हम सब भगवान को मानते हैं पर बदकिस्मती यह है कि हम सब भगवान की एक भी नहीं मानते। इस ‘को’ और ‘की’ में बड़ा अन्तर है। ‘को’ से ‘की’  ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि ताला ‘को’ से नहीं ‘की’ (चाबी) से खुलता है। जिन्दगी की हर एक समस्या का ताला अध्यात्म की ‘की’ से खोला जा सकता है। तुम्हें पता है: दुनिया में भगवान को चाहने वाले कम और भगवान से चाहने वाले ज्यादा हैं।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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