Mithun Sankranti 2026: 15 जून को सूर्य देव करेंगे मिथुन राशि में प्रवेश, सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा से मिलेगा दोगुना फल, नोट करें महापुण्यकाल का समय
punjabkesari.in Wednesday, Jun 10, 2026 - 12:38 PM (IST)
Mithun Sankranti 2026 Date: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के राजा सूर्य देव का राशि परिवर्तन एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। जब सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर अपने मित्र बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करते हैं, तो इस अवसर को मिथुन संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में यह पर्व 15 जून को मनाया जाएगा। इस बार की संक्रांति इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो भक्तों के लिए उन्नति और सफलता के द्वार खोलेगा।

Mithun Sankranti Shubh Muhurat मिथुन संक्रांति 2026: शुभ मुहूर्त और सूर्य गोचर का समय
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य देव 15 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 58 मिनट पर मिथुन राशि में गोचर करेंगे। इसी समय से मिथुन संक्रांति का प्रारंभ होगा।
पुण्यकाल और महापुण्यकाल का समय: संक्रांति के दिन दान-पुण्य के लिए विशेष समय निर्धारित होता है, जिसे पुण्यकाल कहा जाता है:
पुण्यकाल: दोपहर 12:59 बजे से शाम 07:20 बजे तक।
महा पुण्यकाल: दोपहर 12:59 बजे से दोपहर 03:19 बजे तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 05:23 बजे से 07:08 बजे तक (नए कामों के आरंभ हेतु सबसे शुभ समय)।

Mithun Sankranti 2026: सूर्य जो अंधकार को दूर करने वाले और रोशनी प्रदान करने वाले साक्षात देव है। हिंदू धर्म में इन्हें सूर्य देव की संज्ञा दी गई है। धार्मिक आस्था है कि इनके नित्य पूजन से मनुष्य को समृद्धि, मान-सम्मान यश की प्राप्ति होती है। प्रतिदिन इनकी पूजा से व्यक्ति में आस्था और विश्वास पैदा होता है। शास्त्रों के मुताबिक निरंतर कर्म ही धर्म है की सीख व भावना के साथ मिथुन संक्रांति को सूर्यदेव की उपासना से रोगमुक्त, ऊर्जावान और ऊंचा ओहदा पाकर शक्ति संपन्नता प्राप्त होती है। शास्त्रों में मिथुन संक्रांति को खासतौर पर सूर्य नमस्कार और प्रदक्षिणा सहित सूर्य पूजा के ये उपाय बहुत ही शुभ फलदायी बताए गए हैं। जानिए, क्या हैं इनके लाभ
सूर्य पूजा, सूर्य स्त्रोत का पाठ, सूर्य मंत्र का जप करने से मनोरथ सिद्ध होते हैं।
सूर्य गायत्री: ऊं आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात।
सूर्य बीज मंत्र: ऊं ह्रां ह्रीं ह्रौं स: ऊंभूभुर्व: स्व: ऊं आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतम्मर्तंच। हिण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन ऊं स्व: भुव: भू: ऊं स: ह्रौं ह्रीं ह्रां ऊं सूर्याय नम:॥
सूर्य जप मंत्र: ऊं ह्रां ह्रीँ ह्रौं स: सूर्याय नम:।
सूर्य देव को नमस्कार करते हुए सिर को भूमि पर स्पर्श करने से सारे पापों का नाश हो जाता है।
सूर्य देव की पूजा के बाद तन-मन की पवित्रता के साथ परिक्रमा से रोगों से मुक्ति मिलती है। पावनता के लिये नंगे पैर ही परिक्रमा लगाएं।
मिथुन संक्रांति को सूर्य की लाल फूलों या सफेद कमल से पूजा, व्रत-उपवास रखने से सूर्य कृपा इंसान को तमाम ख्याति, सफलता व सुखों से समृद्ध कर देती है।
प्रतिदिन सुबह सूर्यदेव के जल अर्पित करने के उपरांत जमीन पर पड़े जल को अपनी आंखों की पुतलियों पर लगाएं। सूर्य देव से मंगलकामना करें और अपने मस्तिक पर लाल चंदन का तिलक लगाएं। सूर्य की निरंतर पूजा से व्यक्ति निडर और बलवान बनता है। उसके जीवन से अहंकार, क्रोध, कपट, लोभ, इच्छा और बुरे विचारों का नाश होता है।

Mithun Sankranti Daan मिथुन संक्रांति दान
मिथुन संक्रांति पर दान का बहुत महत्व है। गर्मी से जुड़ी वस्तुओं का दान करें, जो शीतलता प्रदान करें जैसे जल, दूध, दही, लस्सी, गुड़ आदि। इसके अतिरिक्त इन वस्तुओं का दान करने से जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती। चावल, गेहूं, छाता, सूती वस्त्र, चप्पल और पंखा।
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Content Writer
Niyati Bhandari