Mark Rutherford Inspirational Story : क्या आप भी किनारे तक पहुंचने से पहले ही थक जाते हैं तो मार्क रुदरफोर्ड के संघर्ष से सीखें कभी न हारने की कला
punjabkesari.in Monday, Mar 16, 2026 - 02:56 PM (IST)
Mark Rutherford Inspirational Story : ब्रिटिश लेखक मार्क रुदरफोर्ड के बचपन का प्रसंग है। एक दिन वह समुद्र के किनारे बैठे थे। दूर सागर में एक जहाज लंगर डाले खड़ा था। वह जहाज तक तैर कर जाने के लिए मचल उठे। मार्क तैरना तो जानते ही थे, कूद पड़े समुद्र में और तैर कर जहाज तक पहुंच गए। मार्क ने जहाज के कई चक्कर लगाए। मन खुशी से झूम उठा। विजय की खुशी और सफलता से आत्मविश्वास बढ़ा। लेकिन जैसे ही उन्होंने वापस लौटने को किनारे की तरफ देखा तो निराशा हावी होने लगी, किनारा बहुत दूर लगा।
सफलता के बाद भी निराशा बढ़ रही थी, अपने ऊपर अविश्वास हो रहा था। जैसे-जैसे मार्क के मन में ऐसे विचार आते रहे उनका शरीर वैसा ही शिथिल होने लगा। फुर्तीले नौजवान होने के बावजूद बिना डूबे ही डूबता सा महसूस करने लगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने विचारों को निराशा से आशा की तरफ मोड़ा, क्षण भर में ही चमत्कार सा होने लगा। वह अपने अंदर परिवर्तन अनुभव करने लगे।
वह तैरते हुए सोच रहे थे कि किनारे तक नहीं पहुंचने का मतलब है मर जाना और किनारे तक पहुंचने का प्रयास है डूब कर मरने से पहले का संघर्ष। इस सोच से जैसे उन्हें संजीवनी मिल गई। उन्होंने सोचा कि जब डूबना ही है तो सफलता के लिए संघर्ष क्यों न करें। भय का स्थान विश्वास ने ले लिया। इसी संकल्प के साथ वह तैरते हुए किनारे तक पहुंचने में सफल हुए। इस घटना ने उन्हें आगे भी काफी प्रेरित किया।

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