क्या माघ पूर्णिमा से पहले एकादशी पर भी लगेगी डुबकी? जानें क्या कहते हैं शास्त्र
punjabkesari.in Sunday, Jan 25, 2026 - 12:51 PM (IST)
Magh Snan 2026 : हिंदू धर्म में माघ का महीना केवल एक कालखंड नहीं, बल्कि आत्मा के शुद्धिकरण और पुण्य संचय का महापर्व माना जाता है। माघ स्नान की परंपरा पौष पूर्णिमा से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलती है। ऐसे में माघ पूर्णिमा 2 फरवरी 2026 से कुछ दिन पहले आने वाली जया एकादशी 29 जनवरी 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस रहता है कि क्या इस दिन संगम या किसी पवित्र नदी में पूर्ण स्नान करना चाहिए। जहां एक ओर माघ का हर दिन स्नान के लिए पावन है, वहीं एकादशी के अपने विशेष नियम और वर्जनाएं हैं। तो आइए शास्त्रों के नजरिए से समझते हैं कि पूर्णिमा से पहले आने वाली इस एकादशी का आध्यात्मिक महत्व क्या है और कल्पवासियों व आम श्रद्धालुओं को इस दिन स्नान करते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

जया एकादशी और माघ स्नान का संबंध
जया एकादशी, जो माघ मास के शुक्ल पक्ष में आती है, भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। शास्त्रों के अनुसार, माघ मास के प्रत्येक दिन स्नान का महत्व है, लेकिन एकादशी के दिन स्नान करने से पहले कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए।

स्नान और बाल धोने का नियम
माघ स्नान के दौरान आमतौर पर संगम या नदी में सिर से डुबकी लगाने की परंपरा है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं और स्वप्न शास्त्र/ज्योतिष के अनुसार, एकादशी के दिन बाल धोना या सिर से स्नान करना वर्जित माना गया है। इस दिन जप, तप और दान का विशेष महत्व है। यदि आप माघ स्नान के संकल्प में हैं, तो आप शरीर शुद्धिकरण के लिए स्नान कर सकते हैं, लेकिन पूर्ण डुबकी या सिर धोने से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
शास्त्रों का संकेत
कई विद्वानों का मानना है कि एकादशी पर केवल मानसिक स्नान या प्रतीकात्मक स्नान करना चाहिए ताकि व्रत के नियमों का उल्लंघन न हो।

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