भगवान अय्यप्पा ने पहनी सोने की ‘तंका अंकी' पोशाक, मंडल पूजन के लिए खास तैयार की गई ड्रैस

2020-12-27T14:27:06.157

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सबरीमाला मंदिर के अधिष्ठात्री देव भगवान अय्यपा के दुनिया भर में बहुत अनुयायी या फिर भक्त हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर साल भगवान अय्यप्पा के पावन मंदिर में मंडल पूजा संपन्न की जाती है। हालांकि प्रत्येक वर्ष इसकी धूम काफी अलग होती है। चूंकि इस बार कोरोना काल था, तो ऐसे में मंडल पूजा का पूरा आयोजन के दौरान कोरोना महामारी के मद्देनज़र सख्त दिशानिर्देशों के बीच ही संपन्न किया गया। अगर प्रत्येक साल की बात करें तो इस आयोजन में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु कतारों में लगे दिखाई देते हैं। मगर इस बार ऐसा कोई नज़ारा देखने को नहीं मिला। बल्किस कोविड- 19 के चलते लागू पांबदियों को ध्यान में रखते हुए इस साल मंडल पूजन में मामूली सी भीड़ दिखाई दी।
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इस पूजा के लिए भगवान अय्यप्पा को स्वर्ण पोशाक पहनाई गई, जिसे तंकी अंगी या तंका अंकी कहा जा रहा है। ‘तंका अंकी’ को सबरीमला पहुंचाने वाली यह शोभायात्रा चार दिन पहले राज्य के प्रमुख तीर्थ और भगवान कृष्ण के अर्णमुला श्री पार्थसारथी मंदिर से शुरू हुई, जहां पर यह पवित्र पोशाक रखी जाती है। बताया गया इस पोशाक बीते शुक्रवार शाम को आनुष्ठानिक शोभायात्रा के जरिए अर्णमुला स्थित श्री पार्थसार्थी मंदिर से लाया गया था।  
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मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीपी) द्वारा बताया गया कि त्रावणकोर के राजा ने वर्ष 1973 में 420 मुद्राओं के वजन के बराबर इस ‘अंकी' को भगवान अय्यपा को समर्पित किया था। हर वर्ष मंडल पूजा से पहले ‘तंका अंकी' को आनुष्ठानिक शोभायात्रा के साथ अर्णमुला मंदिर से सबरीमला ले जाया जाता है।  शनिवार को मंडल पूजा के दौरान भगवान अय्यपा को यह पवित्र पोशाक पहनाई गई। जो 41 दिवसीय इस तीर्थ यात्रा के समापन का संकेत माना जाता है। इसके साथ ही वार्षिक तीर्थ यात्रा का पहला चरण संपन्न हो जाता है। 
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इस पूजा के बाद शनिवार रात 9  बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए हैं। इसके साथ ही 16 नवंबर को शुरू हुई दो महीने की वार्षिक तीर्थ यात्रा का पहला चरण संपन्न हो गया। अब मंदिर के कपाट 30 दिसंबर को ‘मकरविल्लकु के लिए खुलेंगे जो 14 जनवरी को पड़ेगा।


 


Content Writer

Jyoti

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