Premanand Maharaj : क्या आप जानते हैं वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज का असली नाम ? उस नाम के पीछे छिपी है वैराग्य की गहरी कहानी

punjabkesari.in Thursday, Jan 08, 2026 - 02:07 PM (IST)

Life Story of Premanand Maharaj : वृंदावन की गलियों में राधा नाम की गूंज भरने वाले और अपने कड़वे लेकिन सत्य प्रवचनों से करोड़ों युवाओं का जीवन बदलने वाले संत प्रेमानंद जी महाराज आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सफेद दाढ़ी और शांत मुखमंडल वाले इस संत का अतीत क्या था। उनका असली नाम क्या था और वह कौन सी घटना थी जिसने एक मेधावी छात्र को वैराग्य के मार्ग पर धकेल दिया। तो आइए जानते हैं महाराज जी के जीवन के उस अनछुए सफर की पूरी कहानी के बारे में-

Life Story of Premanand Maharaj

बचपन का नाम और पारिवारिक पृष्ठभूमि
प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसोल गांव में एक अत्यंत धार्मिक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। संन्यास ग्रहण करने से पहले दुनिया उन्हें अनिरुद्ध कुमार पांडे के नाम से जानती थी। उनके दादा भी एक संन्यासी थे, इसलिए भक्ति और आध्यात्मिकता उन्हें विरासत में मिली थी।

मेधावी छात्र से वैरागी बनने का सफर
अनिरुद्ध बचपन से ही बहुत कुशाग्र बुद्धि के थे। स्कूल और कॉलेज के दिनों में वे एक मेधावी छात्र हुआ करते थे। लेकिन उनका मन किताबी ज्ञान से ज्यादा आत्मा और परमात्मा के रहस्यों को खोजने में लगता था। कहा जाता है कि मात्र 13 वर्ष की अल्पायु में, जब बच्चे अपने भविष्य के सपने बुनते हैं, अनिरुद्ध के मन में वैराग्य की लौ जल उठी। एक रात, बिना किसी को बताए, उन्होंने अपने घर का त्याग कर दिया। उन्होंने अपनी सुख-सुविधाओं और उज्ज्वल भविष्य को त्याग कर 'नैष्ठिक ब्रह्मचर्य' का रास्ता चुना।

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अनिरुद्ध से 'प्रेमानंद' बनने की यात्रा
घर छोड़ने के बाद उन्होंने काफी समय काशी (वाराणसी) के घाटों पर बिताया। वहां उन्होंने कठोर तपस्या की और सन्यास की दीक्षा ली। शुरुआत में वे भगवान शिव की भक्ति में लीन थे और उनका नाम 'स्वामी आनंदाश्रम' पड़ा। लेकिन नियति उन्हें कहीं और ले जाना चाहती थी। एक बार एक संत की प्रेरणा से वे वृंदावन आए और यहां आकर वे चैतन्य महाप्रभु की भक्ति पद्धति और राधा रानी के प्रेम में ऐसे डूबे कि हमेशा के लिए यहीं के होकर रह गए। यहीं उन्हें नया नाम मिला प्रेमानंद, जिसका अर्थ है वह जो प्रेम के आनंद में मग्न है।

आज की स्थिति: सेवा और भक्ति का पर्याय
आज महाराज जी की दोनों किडनियां खराब हैं और वे डायलिसिस पर हैं, लेकिन उनकी भक्ति और सेवा में कोई कमी नहीं आई है। वे हर रात 2 बजे वृंदावन की गलियों में 'पदयात्रा' करते हैं और भक्तों की शंकाओं का समाधान करते हैं।

प्रेमानंद महाराज के जीवन से जुड़ी 3 बड़ी सीख
त्याग ही शांति है
असली सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि मन की शांति और ईश्वर के प्रति समर्पण में है।

दृढ़ इच्छाशक्ति
शरीर बीमार हो सकता है, लेकिन आत्मा और संकल्प कभी कमजोर नहीं होने चाहिए।

नाम में क्या रखा है
व्यक्ति अपने जन्म के नाम से नहीं, बल्कि अपने कर्मों और भक्ति से पहचाना जाता है।

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Content Editor

Sarita Thapa

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