Last Mangla Gauri Vrat 2026 : मंगला गौरी व्रत पर बन रहा है भौम प्रदोष का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
punjabkesari.in Monday, Aug 24, 2026 - 04:49 PM (IST)
Last Mangla Gauri Vrat 2026 : हिंदू धर्म में सावन के महीने का बहुत खास महत्व है। जैसे के सभी को पता है कि सावन का महीना अपने अंतिम चरण पर पहुंच चुका है। सावन माह में हर मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है। 25 अगस्त, 2026 को सावन का अंतिम मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से और विधि-विधान से माता पार्वती की पूजा करने और व्रत रखने से मां गौरी की खास कृपा बनी रहेगी और जीवन में आने वाली सारी परेशानियों से छुटाकरा मिलेगा। सावन का अंतिम मंगला गौरी व्रत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस दिन मंगलवार के दिन त्रयोदशी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे भौम प्रदोष व्रत का महासंयोग बन रहा है। एक ही दिन माता मंगला गौरी और भगवान शिव की पूजा का यह दुर्लभ योग साधकों के सभी संकट दूर करने वाला माना गया है। तो आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-

मंगला गौरी 2026 शुभ संयोग
पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने का विधान है। इस वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त 2026 को सुबह 06 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर 26 अगस्त 2026 को सुबह 07 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। मंगलवार का दिन होने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। खास बात यह है कि इसी दिन सावन का अंतिम मंगला गौरी व्रत भी पड़ रहा है। ऐसे में एक ही दिन माता पार्वती और भगवान शिव की संयुक्त आराधना का अत्यंत पावन और फलदायी संयोग बन रहा है।
मंगला गौरी व्रत शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त – 04 बजकर 27 मिनट से 05 बजकर 11 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त – 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक
विजय मुहूर्त – 02 बजकर 32 मिनट से 03 बजकर 24 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – 06 बजकर 51 मिनट से 07 बजकर 13 मिनट तक
सायाह्न सन्ध्या – 06 बजकर 51 मिनट से 07 बजकर 57 मिनट तक
प्रदोष पूजा मुहूर्त – 06 बजकर 51 मिनट से 09 बजकर 04 मिनट तक
निशिता मुहूर्त – 12 बजकर 01 मिनट से 26 अगस्त 12 बजकर 45 मिनट तक
मंगला गौरी पूजा विधि
मंगला गौरी व्रत करने वाली महिलाओं और कन्याएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें और माता पार्वती और शिव जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता पार्वती और शिव जी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
माता पार्वती और शिव जी की प्रतिमा के समक्ष दीप और धूप जलाएं और माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
अंत में फल और मिठाई का भोग लगाएं और आरती कर पूजा संपन्न करें।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
