क्यों अनोखा है खंडेराव का आग पर चलने वाला मेला? जानिए इसकी प्राचीन कथा
punjabkesari.in Saturday, Nov 29, 2025 - 02:07 PM (IST)
Khanderao Temple Fire Festival: महाराष्ट्र के पुणे जिले के पास जेजुरी में स्थित खंडेराव मंदिर एक असाधारण और चमत्कारी परंपरा का केंद्र है। यह मंदिर, जिसे लाखों भक्तों द्वारा कुलदैवत माना जाता है, प्रतिवर्ष एक अनूठा 'अग्नि मेला' आयोजित करता है। यह 400 साल पुरानी परंपरा भक्तों के अटूट विश्वास का प्रतीक है, जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद आभार व्यक्त करने के लिए धधकते हुए अंगारों पर नंगे पैर नौ कदम चलते हैं। तो आइए जानते हैं इस अद्भुत अनुष्ठान के पीछे की कहानी और भक्तों की गहन आस्था की यात्रा के बारे में-

खंडेराव महाराज महाराष्ट्र के कुलदैवत
खंडेराव को भगवान शिव का एक रूप माना जाता है और वे महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लाखों लोगों के कुलदैवत हैं। यह मंदिर पुणे के पास जेजुरी में स्थित है और इसे सोने की जेजुरी भी कहा जाता है क्योंकि मंदिर को भक्तों द्वारा अर्पित किए गए हल्दी से ढका रहता है, जिससे यह सोने जैसा प्रतीत होता है।
क्या है प्रसिद्ध अग्नि मेला?
अग्नि मेला, खंडेराव महाराज के प्रमुख उत्सवों में से एक है। यह एक ऐसा अनुष्ठान है जिसमें भक्तगण एक खास समय पर जलते हुए कोयले या अंगारों के ढेर पर नंगे पैर चलते हैं। इस प्रक्रिया में, वे खौलते हुए अंगारों पर विश्वास और भक्ति के साथ लगभग 9 कदम चलते हैं।

400 साल पुरानी परंपरा की कहानी
यह परंपरा 400 से अधिक वर्षों से चली आ रही है और इसकी उत्पत्ति को लेकर कई लोक कथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि यह अनुष्ठान उन योद्धाओं की परंपरा से जुड़ा हुआ है जो खंडेराव महाराज के प्रति अपनी निष्ठा और साहस प्रदर्शित करने के लिए इस कठोर परीक्षा से गुजरते थे। यह परीक्षा न केवल शारीरिक शक्ति बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक दृढ़ता का भी प्रमाण थी। समय के साथ, यह योद्धाओं की परंपरा से भक्तों की मन्नत पूरी करने के एक धार्मिक अनुष्ठान में बदल गई।
भक्तों का अटल विश्वास है कि खंडेराव महाराज की शक्ति और उनकी भक्ति ही उन्हें इस अग्नि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की चोट से बचाती है। यह मेला हजारों भक्तों को आकर्षित करता है जो इस अद्भुत और चमत्कारी दृश्य को देखने आते हैं।

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