Kashi Vishwanath Dham : महाशिवरात्रि पर काशी में उमड़ेगा सैलाब ! 1 हजार भक्त करेंगे मंगला आरती, 10 लाख करेंगे दर्शन
punjabkesari.in Friday, Feb 13, 2026 - 10:49 AM (IST)
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Kashi Vishwanath Dham :महाशिवरात्रि के अवसर पर इस बार बाबा विश्वनाथ की मंगला आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों के मुकाबले अधिक रहने की संभावना है। अनुमान है कि करीब एक हजार भक्त ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली इस विशेष आरती के साक्षी बनेंगे, जो पिछले चार साल के औसत से लगभग 250 अधिक है। साथ ही, महाशिवरात्रि के 45 घंटे 45 मिनट के दौरान दस लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के जलाभिषेक करने का अनुमान जताया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 15 और 16 फरवरी को सभी प्रकार की ऑनलाइन बुकिंग अस्थायी रूप से बंद रहेगी।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, पिछली महाशिवरात्रियों में मंगला आरती में औसतन 750 लोग शामिल हुए थे, लेकिन इस बार संख्या हजार के पार पहुंच सकती है। आरती का आयोजन तड़के तीन से चार बजे के बीच होगा। आरती में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा और गर्भगृह के चारों द्वारों के सामने बैठने की व्यवस्था की जाएगी।
सामान्य दिनों में मंगला आरती में लगभग 250 लोग शामिल होते हैं। हालांकि, हाल ही में प्रशासन ने 500 भक्तों की क्षमता के साथ एक रिहर्सल भी किया और ऑफलाइन टिकटों की संख्या बढ़ाई गई।
13 फरवरी से 13 मार्च के बीच कुल 23 दिनों तक मंगला आरती के ऑनलाइन टिकट उपलब्ध नहीं रहेंगे। ट्रस्ट की वेबसाइट पर इस अवधि की बुकिंग पूर्ण रूप से भरी दिखाई दे रही है। इसके अलावा महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी और होली जैसे प्रमुख अवसरों पर ऑनलाइन बुकिंग निलंबित रहेगी। 13 मार्च के बाद की बुकिंग 12 फरवरी से शुरू की जाएगी।
यदि पिछले वर्षों पर नजर डालें तो 2017 में लगभग 700 लोगों ने मंगला आरती में भाग लिया था और करीब दो लाख भक्तों ने दर्शन किए थे। 2021 में यह संख्या बढ़कर 1100 आरती सहभागी और लगभग ढाई लाख दर्शनों तक पहुंची। वहीं, कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद 2022 की शिवरात्रि पर एक ही दिन में करीब छह लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे।
महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ का विशेष नगर भ्रमण भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। टेढ़ीनीम से सिगोंल (दंड) के साथ राजसी अंदाज में निकलने वाली यह शोभायात्रा बेहद विशिष्ट मानी जाती है। नवरत्नों से सुसज्जित छत्र और नवग्रह की काष्ठ से निर्मित सिंहासन पर विराजमान होकर बाबा नगर भ्रमण करेंगे। वर्ष में चार बार निकलने वाले इस भ्रमण में महाशिवरात्रि का आयोजन सबसे खास माना जाता है। इस दिन वे माता गौरा के बिना, अपने भक्तों और गणों के साथ राजसी स्वरूप में दर्शन देते हैं, जो शिव के वैराग्य और दांपत्य संतुलन का प्रतीक है। इस बार काशी की ऐतिहासिक शिव-बारात में उनका प्रतीकात्मक चल स्वरूप विशेष आकर्षण रहेगा।
