Jawaharlal Nehru Story : आज़ादी का असली मतलब जानना है तो नेहरू जी और बुजुर्ग महिला के कुंभ मेले का यह ऐतिहासिक प्रसंग जरूर पढ़ें

punjabkesari.in Friday, Jul 31, 2026 - 04:31 PM (IST)

Jawaharlal Nehru Story : जवाहरलाल नेहरू जब भी इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) में होते, गंगा के दर्शन करने जरूर जाते। वहां उन्हें काफी सुकून मिलता था। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी यह सिलसिला जारी रहा। एक बार जब कुंभ मेला लगा तो नेहरू जी भी आए। उनके आने से लोग उत्साहित थे। अपार जनसमूह के बीच उनकी कार किसी तरह धीरे-धीरे आगे सरक रही थी। जैसे ही लोग नेहरू जी को देखते, जोर-जोर से चिल्लाने लग जाते, ''पंडित जी आ गए, जवाहर लाल नेहरू की जय, प्रधानमंत्री जी की जय।''

तभी न जाने कहां से एक वृद्ध महिला भीड़ को चीरती हुई उनकी कार के पास आई और हाथ उठाकर जोर-जोर से पुकारने लगी, ''अरे ओ जवाहर, रुक जा, खड़ा तो रह। तू कहता है न कि आजादी मिल गई है, लेकिन आजादी है कहां?

किसको मिली है? हां, शायद तुझे मिली हो क्योंकि तू है जो मोटर में घूम रहा है। मेरे लड़के को तो एक नौकरी तक नहीं मिल रही। कहां है आजादी, बता?''

वृद्धा को देखकर नेहरू जी ने फौरन गाड़ी रुकवाई और नीचे उतरकर उस बुढ़िया के पास गए और आजादी का असली मतलब बताते हुए कहा, ''माता जी, आप कहती हैं कि आजादी कहां है? 

जहां आप अपने देश के प्रधानमंत्री को 'तू' कहकर पुकार सकती हैं, उसे डांट सकती हैं, क्या यह आजादी नहीं है? क्या पहले ऐसा था? नहीं न। आप बेहिचक चली आईं हमारे पास अपनी शिकायत रखने। यही तो आजादी है। आपकी शिकायत पर ध्यान दिया जाएगा।''

यह सुनकर महिला थोड़ी देर के लिए चुप होकर नेहरू जी को देखती रही। फिर बोली, ''सच ही कहा था बापू ने कि नेहरू जी हर किसी से बड़े प्यार से बात करते हैं।''

 


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Content Editor

Sarita Thapa

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