Jaya Parvati Vrat Katha : कैसे मां पार्वती ने एक ब्राह्मण दंपत्ति की सूनी गोद को खुशियों से भर दिया, पढ़ें यह पौराणिक कथा
punjabkesari.in Sunday, Jul 26, 2026 - 10:48 AM (IST)
Jaya Parvati Vrat : सनातन धर्म में जया पार्वती का बहुत खास महत्व है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है, यह व्रत श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। यह व्रत मुख्य रूप से अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान प्राप्ति की कामना के लिए रखा जाता है। माना जाता है कि इस व्रत के दौरान एक विशेष पौराणिक कथा पढ़ने का विधान है। मान्यता है कि इस कथा को पढ़ने या सुनने मात्र से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और सूनी गोद हरी हो जाती है। तो आइए जानते हैं मां पार्वती की असीम कृपा की यह पावन कहानी के बारे में-
जया पार्वती व्रत कथा
एक बार की बात है, कौडिन्य नगर में एक ब्राह्मण दंपत्ति रहती थी।उस ब्राह्मण का नाम वामन और उसकी पत्नी का नाम सत्या था। उनके घर में किसी भी चीज़ की कमी नहीं थी परंतु वे संतान के सुख से वंचित थे। इस बात से दोनों हर समय दुखी रहते थे।एक दिन भ्रमण करते हुए नारद मुनि उनके घर आए। दोनों ने मिलकर नारद मुनि की बहुत अच्छे से सेवा और सत्कार किया। जिसके बाद उन्होंने अपनी समस्या नारद मुनि से कही। समस्या को सुनकर नारद जी ने उन्हें बताया कि तुम्हारे नगर के बाहर जो वन है उसके दक्षिणी भाग में बिल्व वृक्ष के नीचे भगवान शिव माता पार्वती के संग लिंग रूप में विराजित हैं। तुम दोनों जाओ और उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा करो। उनकी सेवा करने से तुम्हारी हर मनोकामना अवश्य पूरी होगी। ब्राह्मण दंपत्ति ने नगर के बाहर उस बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग को ढूंढ लिया और दोनों ने पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना प्रारंभ कर दी।
इस प्रकार पूरे 5 वर्षों तक दोनों सच्चे मन और नियमित रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करते रहे। एक दिन जब ब्राह्मण पूजा के लिए फूल तोड़ रहा था, तभी उसे एक सांप ने काट लिया और उसकी मृत्यु हो गई। ब्राह्मण जब काफी समय तक वापस घर न आया तो सत्या, जो कि ब्राह्मण की पत्नी थी, चिंतित हो गई और उसे ढूंढने के लिए वन में जा पहुंची। अपने पति को ऐसी अवस्था में देखकर ब्राह्मण की पत्नी सत्या विलाप करने लगी और माता पार्वती का स्मरण करने लगी। ब्राह्मणी की पुकार सुनकर, माता पार्वती प्रकट हुईं और ब्राह्मणी का कष्ट देखकर देवी पार्वती ने ब्राह्मण के मुख में अमृत की कुछ बूंदें डाल दीं, जिससे ब्राह्मण पुनः जीवित हो गया। ये देखकर सत्या बेहद प्रसन्न हो उठी और ब्राह्मण दंपत्ति ने माता पार्वती का पूजन किया। माता पार्वती उनकी पूजा से प्रसन्न हुई और उन्हें वर मांगने के लिए कहा। तब दोनों ने माता पार्वती से संतान प्राप्ति का वरदान मांगा। माता पार्वती ने दंपत्ति से कहा कि, तुम दोनों जया पार्वती का व्रत श्रद्धापूर्वक करो, इससे तुम्हारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। जिसके बाद ब्राह्मण दंपत्ति ने मां पार्वती के बताए अनुसार व्रत का पालन किया, जिसके फलस्वरूप उन्हें संतान की प्राप्ति हुई और वे सुखी एवं खुशहाल जीवन व्यतीत करने लगे।
एक अन्य कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। दोनों बहुत ही दयालु और संवेदनशील थे। उन दोनों के जीवन में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं थी लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी। दोनों पति-पत्नी संतान प्राप्ति की कामना लेकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने लगे और भक्ति में लीन हो गए। एक दिन भगवान शिव ब्राह्मण दंपती की पूजा से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और कहा कि पास के जंगल में मेरा शिवलिंग स्थित है जिसकी कभी भी कोई पूजा नहीं करता है, तुम दोनों वहां जाकर उनकी पूजा-अर्चना करो। भगवान शिव की बात सुनकर दोनों ने वैसा ही किया और जंगल में जाकर पूजा अर्चना करने लगें। पूजा के लिए ब्राह्मण पानी खोजने गया, तभी उसे एक सांप ने काट लिया, जिसकी वजह से वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गया। काफी समय तक वापस न आने पर पत्नी को चिंता हुई और वह पति को तलाशने निकली।लेकिन थक-हारकर वह शिवलिंग के पास बैठ गई और भगवान शिव की तपस्या करने लगी। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने ब्राह्मण को जीवनदान दे दिया और उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। ब्राह्मण पति-पत्नी संतान की प्राप्ति होने के बाद सुख-शांति से अपना जीवन व्यतीत करने लगे।
