जापान की परम्पराओं में मिलता है भारतीय संस्कृति का दर्शन: स्वामी ज्ञानानंद
punjabkesari.in Saturday, Jun 20, 2026 - 02:56 PM (IST)
टोक्यो (जापान) (राजन सपड़ा): गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सान्निध्य एवं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व जीओ गीता के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में भारत सहित अमरीका, ऑस्ट्रेलिया एवं स्पेन आदि देशों से जापान पहुंचे श्रद्धालुओं ने सर्वप्रथम टोक्यो के सेनसोजी स्थित विशाल एवं पौराणिक बौद्ध मंदिर के दर्शन किए। स्वामी ज्ञानानंद महाराज की अगुवाई में मंदिर पहुंचे भारतीयों को भारत और जापान की संस्कृति को एक साथ आत्मसात करने का अवसर मिला। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण तब सामने आया जब भगवान बुद्ध के मंदिर में श्री और स्वास्तिक के चिन्हों के साथ धूप-दीप जैसी भारतीय आध्यात्मिक परम्पराएं देखने को मिलीं।
जानकारी अनुसार भगवान बुद्ध की अत्यंत प्राचीन मान्यताओं एवं परम्पराओं से जुड़ा टोक्यो के बौद्ध मंदिर में प्रतिवर्ष 3 करोड़ से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक दर्शनों के लिए आते हैं। जापान में प्रवासी भारतीयों एवं भारत के लोगों से रू-ब-रू होते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भगवान बुद्ध को हमारी सनातन परम्पराओं में भी भगवान के अवतार के रूप में स्वीकार किया गया है। ऐसे में बौद्ध समाज और सनातन धर्म को मिलकर विश्व शांति के लिए काम करना चाहिए। पूरे विश्व में शांति का प्रकाश फैलाने के लिए गीता से बड़ा कुछ नहीं है।
गीता मनीषी ने कहा कि जापान में अनेक ऐसी परम्पराएं हैं, जिन्हें भारतीय संस्कृति का दर्शन मिलता है। तत्पश्चात गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल एवं गीता जयंती मेला प्राधिकरण के सदस्य विजय नरूला सहित प्रतिनिधिमंडल संग जापान की संसद के उच्च सदन (हाऊस ऑफ काऊंसलर्स) के लिए योशियो मोचिजुकी एवं निचले सदन (हाऊस ऑफ रिप्रैजैंटेटिव्स) के लिए वहां के सांसद अटलांटिक फ्लैट को श्रीमद् भगवद् गीता भेंट की।
इसी कड़ी में स्वामी ज्ञानानंद महाराज द्वारा जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डैमोक्रेटिक पार्टी के मुख्यालय में श्रीमद् भगवद् गीता को विराजमान करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा जापान सरकार में मंत्री यासुतोशी निशिमुरा को भी भेंट स्वरूप गीता प्रदान की गई।
