जंगल में बैठा संत क्यों कहलाया असली सम्राट ? जानें इसके पीछे का रहस्य
punjabkesari.in Thursday, May 21, 2026 - 05:27 PM (IST)
Inspirational Story : एक संत के पास जो भी समस्या लेकर आता, वह उसका मार्गदर्शन करते, उसके कष्टों का निराकरण करते और जाते-जाते उसे आत्मबोध भी कराते। वे अधिकतर जंगल में बनी अपनी कुटिया में ही रहते। एक बार जंगल से सम्राट की सवारी निकली तो सम्राट की नजर संत पर पड़ी। उन्हें देखते ही सम्राट ने अपना काफिला रोक दिया।
सम्राट ने प्रणाम करके उनसे पूछा, “आप कौन हैं?
संत ने बिना उनकी तरफ ध्यान दिए लापरवाही से उत्तर दिया, “मैं सम्राट हूं। इस उत्तर से सम्राट चौंक गए और संभलकर बोले, “आप कहां के सम्राट हैं? कैसे सम्राट हैं?
जंगल में बैठे हैं, फिर भी खुद को सम्राट कहते हैं?”
इस पर संत ने पलटकर पूछा, “तुम कौन हो?”
सम्राट सोच में पड़ गया कि मेरे काफिले को देखकर ही हर कोई समझ जाता है कि ये सम्राट हैं, अब मैं इन्हें क्या जवाब दूं! फिर भी सम्राट ने जवाब दिया, “मेरे पास अनेक सेवक हैं, अपार सेना है, धन-दौलत है, ठाठ-बाठ हैं, इसलिए मैं असली सम्राट हूं। लेकिन तुम यहां जंगल में बैठकर खुद को सम्राट कहते हो, इस तरह का भ्रम पालना ठीक नहीं है।”
सम्राट की बात सुनकर संत ने उत्तर दिया, “सेवक उसे चाहिए, जो आलसी हो। मैं आलसी नहीं हूं। इसलिए मेरे साम्राज्य में सेवक की जरूरत ही नहीं होती। सेना उसे चाहिए, जिसके शत्रु हों। दुनिया में कोई मेरा शत्रु ही नहीं है, इसलिए मेरे साम्राज्य में सेना की भी जरूरत नहीं है। धन और वैभव उसे चाहिए जो दरिद्र हो। मैं दरिद्र नहीं हूं, इसलिए मुझे धन-संपत्ति की भी जरूरत नहीं है, यह उत्तर सुनकर सम्राट का सिर संत के प्रति श्रद्धा से झुक गया।
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