अगर आपके घर भी हुए हैं मांगलिक कार्य तो न करें श्राद्ध

9/17/2019 4:29:14 PM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष की शुरूआत हो चुकी है। ऐसा कहा जाता है कि श्राद्ध करने से हमारे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। पितृ पक्ष में अपने पितरों को पिंडदान, तर्पण, भोजन आदि सम्मानपूर्वक दिया जाता है, जिससे उनकी आत्माएं तृप्त हो जाती हैं। लेकिन बहुत से लोग किसी न किसी कारण से श्राद्ध नहीं कर पाते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। हर किसी को अपने पितरों का श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। किंतु कई लोगों के घर में मांगलिक काम हुए हैं तो ऐसे में उन लोगों को सोच होगी कि श्राद्ध करें ये न करें। तो आइए जानते हैं इसके बारे में। 
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ज्योतिषाचार्य के अनुसार जिन लोगों के यहां सालभर के अंदर विवाह, उपनयन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य हुए हैं, वे लोग पितृ पक्ष में शामिल नहीं होंगे। उन लोगों को अपने पितरों को तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध का भोजन अर्पित नहीं करना चाहिए।
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श्राद्ध अपने माता-पिता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का प्रतीक है। ऐसे में आप पिंडदान और तर्पण न करें, लेकिन अमावस्या के दिन आप ब्राह्मणों को भोजन करा सकते हैं या फिर अन्न दान कर सकते हैं। इसके अलावा दो बातें और ध्यान रखने वाली हैं कि आपको श्राद्ध के दौरान सिर मुड़ाने की परंपरा को भी नहीं निभाना है और न ही प्रतिदिन ग्रास देना है। यह सभी बातें श्राद्ध कर्म में शामिल होती हैं। आपके घर मांगलिक कार्य हुआ है, ऐसे में आप ये सब नहीं कर सकते हैं।
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दरअसल, जब भी कोई बड़ा मांगलिक कार्य होता है, तो उस दौरान पितरों को भी विधि विधान से आमंत्रित किया जाता है। हमारे पितरों की आत्माएं उस मांगलिक कार्य से जुड़ती हैं और हमारी ओर से की गई सेवा से वे तृप्त होती हैं। जब मांगलिक कार्य के दौरान ही आपने एक बार अपने पितरों को तृप्त कर दिया है, तो फिर आपको पितृ पक्ष में दोबारा श्राद्ध कर्म की आवश्यकता नहीं है। 


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