Hasanamba Temple: 800 साल पुराना यह मंदिर साल में एक बार खुलता है, जहां कभी नहीं बुझता अखंड दीपक

punjabkesari.in Wednesday, Feb 04, 2026 - 02:06 PM (IST)

Hasanamba Temple Mystery: भारत में आस्था और रहस्य से जुड़े हजारों मंदिर हैं, लेकिन कुछ धार्मिक स्थल ऐसे हैं, जिनकी परंपराएं और मान्यताएं लोगों को चौंका देती हैं। ऐसा ही एक अद्भुत मंदिर कर्नाटक के हसन जिले में स्थित हसनंबा देवी मंदिर है। यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है, क्योंकि यह साल में केवल एक बार, वह भी दिवाली के आसपास, श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है।

Hasanamba Temple

Hasanamba Temple History: 12वीं शताब्दी में हुआ था निर्माण
हसनंबा मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में होयसला शैली में किया गया था। यह मंदिर लगभग 800 साल पुराना है और इसकी मुख्य देवी आदि शक्ति हसनंबा हैं। मंदिर की वास्तुकला अत्यंत विशिष्ट है और इसे चींटी के टीले (एंथिल) के आकार में निर्मित किया गया है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है।

Hasanamba Temple

साल में एक बार क्यों खुलता है हसनंबा मंदिर?
हसनंबा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरे साल बंद रहता है और केवल एक सप्ताह के लिए, दिवाली के समय भक्तों के दर्शन के लिए खोला जाता है। जैसे ही मंदिर खुलता है, लाखों श्रद्धालु देवी के दर्शन के लिए हसन पहुंचते हैं। मंदिर खुलने वाले दिन प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की जाती है, क्योंकि श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक होती है।

Hasanamba Temple

Hasanamba Temple Miracles: कभी न बुझने वाला नंदा दीपम
जब मंदिर दिवाली पर खोला जाता है, तब इसके गर्भगृह में दो बोरी चावल, एक घी का दीपक (नंदा दीपम) और जल रखा जाता है। इसके बाद मंदिर को बंद कर दिया जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि जब मंदिर एक साल बाद दोबारा खुलता है, तो चावल पके हुए और गर्म पाए जाते हैं। वे खराब नहीं होते और नंदा दीपम में रखा घी पूरे साल जलता रहता है। इन्हीं चमत्कारी घटनाओं के कारण यह मंदिर रहस्य और आस्था का केंद्र बना हुआ है।

Hasanamba Temple

शिव, अर्जुन और रावण की अनोखी मूर्तियां
मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को सिद्धेश्वर स्वामी के दर्शन होते हैं। यहां भगवान शिव को पारंपरिक शिवलिंग रूप में नहीं, बल्कि अर्जुन को पशुपतास्त्र प्रदान करते हुए दर्शाया गया है।

इसके अलावा मंदिर में रावण की दस सिरों वाली वीणा बजाती हुई मूर्ति भी स्थित है, जो इसे और अधिक विशिष्ट बनाती है।

Hasanamba Temple Story: सात माताओं की रहस्यमयी कथा
मान्यता है कि एक समय सप्त मातृकाएं ब्राह्मी, महेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वरकी, इंद्राणी और चामुंडी दक्षिण भारत आई थीं। हसन क्षेत्र की सुंदरता से प्रभावित होकर उन्होंने यहीं निवास करने का निर्णय लिया। महेश्वरी, कौमारी और वैष्णवी मंदिर के टीलों में रहने लगीं। 
ब्राह्मी केंजम्मा क्षेत्र में इंद्राणी, वरकी और चामुंडी होंडा क्षेत्र के एक कुएं में निवास करने लगीं। इन्हीं में से हसनंबा देवी को सबसे शक्तिशाली माना गया।

Hasanamba Meaning: हसनंबा नाम का अर्थ
‘हसनंबा’ का अर्थ है वह माता जो मुस्कुराते हुए अपने भक्तों को सभी वरदान प्रदान करती हैं। मान्यता है कि देवी अपने सच्चे भक्तों पर अत्यंत कृपालु होती हैं, लेकिन जो भक्तों को कष्ट पहुंचाते हैं, उन्हें कठोर दंड भी देती हैं।

Shoshi's story शोशी कल की कथा: बहू बनी पत्थर
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, हसनंबा देवी की एक भक्त को उसकी सास ने अत्यंत प्रताड़ित किया। दुखी होकर भक्त देवी के मंदिर में प्रार्थना करने पहुंची। देवी ने उस पर करुणा दिखाते हुए उसे पत्थर में परिवर्तित कर अपने पास रख लिया, ताकि वह आगे कष्ट न सहे।

इस पत्थर को ‘शोशी कल’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है बहू। मान्यता है कि यह पत्थर हर साल चावल के एक दाने के बराबर देवी हसनंबा की ओर बढ़ता है और कलियुग के अंत में देवी तक पहुंच जाएगा।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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