Gopal Krishna Gokhale Story : अपनी भूल कबूल करने का साहस चाहिए तो जरूर पढ़ें गोपाल कृष्ण गोखले की यह अनमोल कहानी

punjabkesari.in Tuesday, Jun 16, 2026 - 02:29 PM (IST)

Gopal Krishna Gokhale Story : एक दिन अध्यापक ने गणित की परीक्षा ली। परीक्षा से पहले उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, "जो सबसे अधिक अंक प्राप्त करेगा, उसे पुरस्कार दिया जाएगा।" 

Gopal Krishna Gokhale Story

प्रश्न अत्यंत कठिन था, सरलता से हल नहीं किया जा सकता था। सभी विद्यार्थी जी-जान से जुटे हुए थे। काफी देर तक कोई भी विद्यार्थी उस प्रश्न को हल नहीं कर पाया। आखिरकार एक बालक प्रश्न हल करके अध्यापक के सामने पहुंचा। अध्यापक महोदय ने पाया कि उत्तर सही है।

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दूसरे सभी विद्यार्थी हैरान थे कि यह लड़का सही हल कैसे निकाल सका, क्योंकि पढ़ने-लिखने में तो वह कमजोर माना जाता था। अगले दिन अध्यापक महोदय जैसे ही कक्षा में आए, पुरस्कार प्राप्त करने वाला विद्यार्थी उनके चरणों से लिपट गया और रोने लगा। अध्यापक ने पूछा, "क्या बात है। तुम रो क्यों रहे हो? 

तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि पुरस्कार प्राप्त करके तुमने अच्छा विद्यार्थी होने का प्रमाण दिया है।" 

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बालक रोते हुए बोला, "आप यह पुरस्कार वापस ले लीजिए क्योंकि मैं इसका अधिकारी नहीं हूं। मैंने पुस्तक से नकल करके प्रश्न का सही हल निकाला था। गलती के लिए मुझे क्षमा कर दीजिए। मैं खुद को सुधारने का संकल्प लेता हूं।"

अध्यापक ने उसे पास बुलाकर कहा, "सही हल तुम्हें नहीं आया, लेकिन धोखा देना भी तुम्हें नहीं आता। यह तुम्हारा स्वभाव नहीं है, इसलिए कल घर जाने के बाद तुम्हारा मन दुखी रहा और तुमने सही बात कह डाली। तुमने खुद सही हल नहीं निकाला, मुझे इसका दुख नहीं है। पर तुमने सही बात कह डाली, उसकी मुझे बहुत खुशी है। गलती मान लेने वाले बालक बड़े होकर बड़ा नाम और काम करते हैं।" आगे चलकर यह बालक गोपाल कृष्ण गोखले के नाम से जाना गया।

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Content Editor

Sarita Thapa

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