ऋषियों की धरती कुरुक्षेत्र में स्थापित है ये अद्भुत कुंड, श्री कृष्ण ने भी किया था यहां स्नान

2019-12-06T16:56:35.297

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
यूं तो साल में पढ़ने वाली प्रत्येक एकादशी का अपना खासा महत्व है। परंतु ब्रह्मपुराण के मुताबिक मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का अन्य तिथियों से सबसे अधिक माना जाता है। बता दें मार्गशीर्ष माह में आने वाली इस एकादशी को दिन गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो इस बार 8 दिसंबर को पड़ रहा है। धार्मिक कथांओं के अनुसार इस दिन श्री कृष्ण ने अर्जुन को महाभारत युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश दिया था।
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पुराणों में किए उल्लेख के अनुसार द्वापर युग में हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिल में महाभारत की लड़ाई हुई थी और यहीं ज्योतिसर नामक स्थान पर भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। बताया जाता है कि कुरुक्षेत्र में स्थित ब्रह्मा सरोवर पर हर साल अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस बार गीता जयंती का ये महोत्सव 22 नवंबर से प्रारंभ हो चुका है जो कि 10 दिसंबर तक चलने वाला है।

आइए जानते हैं ब्रह्मा व श्री कृष्ण से जुड़े इस सरोवर के बारे में-
विशाल यज्ञ से बना था ब्रह्म सरोवर
जैसे कि हमने आपको ऊपर बताया कि कुरुक्षेत्र में स्थित ब्रह्मा सरोवर पर प्रत्येक वर्ष अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाता है। ब्रह्मा नामक इस सरोवर के बारे में प्रचलित पौराणिक कथा है जिसके अनुसार कुरूक्षेत्र को ब्रह्मा जी ने विशाल यज्ञ द्वारा इस निर्मित किया था। बता दें सरोवर के अलावा यहां भगवान शिव का भी एक मंदिर स्थित है। गीता जयंती पर सरोवर में दीपदान भी किया जाने की परंपरा है।
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स्नान से मिलती है अश्वमेघ यज्ञ समान पुण्य प्राप्ति
मान्यता है जो भी यहां इस कुंड में स्नान मात्र से अश्वमेघ यज्ञ समान पुण्य प्राप्ति होती है। बता दें ये यह कुंड 1800 फीट लंबा और 1400 फीट चौड़ा है। बताया जाता है खासतौर पर सूर्य ग्रहण तथा गीता जंयती के अवसर पर इस कुंड में स्नान करने के लिए हज़ारों की गिनती में लोग आते हैं। शास्त्रों के अनुसार सूर्यग्रहण के समय सभी देवता यहां कुरुक्षेत्र में मौजूद होते हैं। मान्यता है कि सूर्यग्रहण के अवसर पर ब्रह्मा सरोवर और सन्निहित सरोवर में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 

श्रीकृष्ण ने भी यहां किया था स्नान
सरोवर से जुड़ी मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने भी इस सरोवर में स्नान किया था। प्राचीन काल में ब्रह्म सरोवर का नाम ब्रह्म वेदी और रामहृद था जिसे बाद में राजा कुरु के नाम पर कुरुक्षेत्र रख दिया था। कुरुक्षेत्र का अतीत काफी अत्यंत दिव्य तथा गौरवमय रहा है। इसी धरती पर ऋषियों ने वेदों की रचना की और ब्रह्मा ने विशाल यज्ञ किया था।  
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Jyoti

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