Garud Puran : आपका अगला जन्म कैसा होगा ? गरुड़ पुराण से जानें कर्मों का फल
punjabkesari.in Friday, Jan 30, 2026 - 02:00 PM (IST)
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Garud Puran: हिंदू धर्म के 18 पुराणों में गरुड़ पुराण का एक विशिष्ट स्थान है। प्रायः इसे किसी की मृत्यु के बाद सुना जाता है लेकिन वास्तव में यह पुराण मृत्यु के पश्चात की यात्रा से कहीं अधिक जीवन जीने की कला और कर्मों के विज्ञान पर आधारित है। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने अपने वाहन पक्षीराज गरुड़ को विस्तार से बताया है कि मनुष्य के कर्म किस प्रकार उसके अगले जन्म का निर्धारण करते हैं। सनातन परंपरा में माना जाता है कि आत्मा अजर-अमर है, लेकिन शरीर नश्वर है। यह लेख आपको उन रहस्यों से अवगत कराएगा जो गरुड़ पुराण में अगले जन्म और कर्मों के फल के विषय में बताए गए हैं।

कर्मों का लेखा-जोखा:
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब आत्मा शरीर त्यागती है, तो यमलोक में उसके कर्मों का विश्लेषण होता है। भगवान विष्णु कहते हैं कि मनुष्य जैसा बीज बोता है, वैसी ही फसल काटता है। आपके विचार, वाणी और कृत्य मिलकर आपकी 'संचित पूंजी' बनते हैं, जो यह तय करती है कि आप अगले जन्म में मनुष्य बनेंगे, पशु या फिर देव योनि को प्राप्त होंगे।
आपके कर्म और अगले जन्म की योनियां
शोषण और बेईमानी का फल
जो व्यक्ति दूसरों के धन को छल-कपट से हड़प लेते हैं या पराया धन छीनने की योजना बनाते हैं, वे अगले जन्म में नरक की प्रताड़ना झेलने के बाद पशु योनि में जाते हैं। विशेष रूप से दूसरों का धन हड़पने वाला व्यक्ति अगले जन्म में गिद्ध या कौआ बन सकता है।
गुरु और बुजुर्गों का अनादर
गरुड़ पुराण के अनुसार, जो लोग अपने गुरु का अपमान करते हैं, उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं या माता-पिता को कष्ट देते हैं, वे अगले जन्म में जलहीन स्थान पर कछुए के रूप में जन्म लेते हैं। गुरु का अपमान ब्रह्म-हत्या के समान पाप माना गया है।

महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण
जो पुरुष महिलाओं का अनादर करते हैं, उन पर अत्याचार करते हैं या उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, वे अगले जन्म में भयानक रोगों से ग्रस्त होते हैं और कई जन्मों तक नपुंसक या निम्न योनियों में भटकते रहते हैं। वहीं, जो लोग पराई स्त्री पर कुदृष्टि डालते हैं, उन्हें अगले जन्म में अंधा कुत्ता बनना पड़ता है।
हिंसा और हत्या
बेगुनाह जीवों की हत्या करने वाले या अपनी जीभ के स्वाद के लिए मूक पशुओं को मारने वाले लोग अगले जन्म में स्वयं शिकार बनते हैं। ऐसे व्यक्तियों को बकरी या अन्य जंगली जानवरों के रूप में जन्म लेना पड़ता है, जिन्हें अंततः हिंसक तरीके से मारा जाता है।
परोपकार और सात्विक कर्म
इसके विपरीत, जो व्यक्ति अपने जीवन में दान-पुण्य करते हैं, भूखों को भोजन कराते हैं और निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते हैं, वे उच्च कुल में जन्म लेते हैं। ऐसे जातकों को अगले जन्म में विद्वान, धनवान और सुखी मनुष्य का शरीर प्राप्त होता है।

